मंत्री ने पूछा जिला अस्पताल क्यों है बेहाल
ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़।
अलीगढ़। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 5 जून को अलीगढ़ दौरे से पहले स्वास्थ्य विभाग में स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह का फोन आने के बाद हड़कंप मचा हुआ है। स्वास्थ्य मंत्री ने अधिकारियों से पूछ लिया कि मलखान सिंह जिला अस्पताल में यह सब क्या चल रहा है? वहां पर इतनी अव्यवस्था क्यों है? आप लोग क्या कर रहे हैं? इसके बाद स्वास्थ्य विभाग में अफरा तफरी की स्थिति हो गई है। शनिवार को स्वयं मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एमएल अग्रवाल ने अस्पताल में डेरा डाल लिया और आनन-फानन सभी व्यवस्थाओं को दुरुस्त कराने की कवायद शुरू की गई।
पिछले करीब 2 महीने में मलखान सिंह जिला अस्पताल अपनी अव्यवस्थाओं, मरीजों, तीमारदारों और अन्य लोगों के साथ अभद्रता की घटनाओं के साथ ही बेहद बदहाली के कारण चर्चाओं में रहा। स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सवा महीने तक अस्पताल में एंटी रैबीज इंजेक्शन नहीं रहा। साथ ही जरूरी दवाओं की भी अस्पताल में कमी रही। बच्चा वार्ड की स्थिति बहुत दयनीय रही। यहां पर भीषण गर्मी के चलते कई बच्चों की मौत हुई। एक-एक बेड पर कई बच्चे उपचार के लिए लिटा दिए गए। वार्ड में एसी और पंखे तक खराब रहे। पीने के पानी की स्थिति बहुत खराब रही। इमरजेंसी में अलग से वार्ड की स्थापना नहीं हो सकी। इसके अलावा लगातार ऐसे मामले प्रकाश में आते रहे। यह सब मामले आम जनता के साथ-साथ भाजपा नेता और शहर विधायक संजीव राजा के माध्यम से किसी न किसी रूप में स्वास्थ्य मंत्री और शासन तक पहुंचते रहे। माना जा रहा है कि यही वजह है कि मुख्यमंत्री के दौरे से पहले खुद स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने जिला अस्पताल के संबंध में जानकारी मांगी है। इसको लेकर शनिवार को पूरे दिन विभागीय अधिकारी कवायद करने में जुटे रहे। कर्मचारी अस्पताल की दीवारों पर पुताई, वार्डों की सफाई, अस्पताल परिसर में गंदगी कूड़ा आदि को हटाने में जुटे रहे, लेकिन इन सबके बीच विचारणीय प्रश्न यह है कि लंबे समय से बिगड़ी हुई व्यवस्था को अस्पताल प्रशासन मात्र 2 दिन के अंदर किस हद तक पटरी तक ला सकता है। इस संबंध में अपर निदेशक स्वास्थ्य डॉक्टर गीता प्रधान ने कहा पूरी संभावना है मुख्यमंत्री मलखान सिंह जिला अस्पताल का निरीक्षण करें। क्योंकि शासन के द्वारा बार-बार अस्पताल के संबंध में विवरण मांगा जा रहा है।
- स्वास्थ्य विभाग में अव्यवस्था का चरम हो चुका है। अधिकारी और कर्मचारी अपनी मानसिकता नहीं बदल पा रहे हैं। जबकि मुख्यमंत्री की मंशा है कि गरीब से गरीब व्यक्ति को भी उपचार मिले। जिला अस्पताल के बारे में लगातार शिकायतें मिल रही हैं। जनता को वहां उपचार नहीं बल्कि अभद्रता मिल रही है। इन्हीं सब बातों को शासन ने संज्ञान में लिया है।
- संजीव राजा, विधायक, शहर विधानसभा
ऐसे जिला अस्पताल आ गया शासन के फोकस पर
प्वाइंटर
लोगों की शिकायतें और भाजपा नेताओं से मिले फीडबैक के बाद लिया संज्ञान
अलीगढ़। पिछले दिनों मलखान सिंह जिला अस्पताल की इमरजेंसी में तीमारदारों के साथ अभद्रता की कई घटनाएं हुईं। इसके अलावा मरीजों में उनके तीमारदारों से पैसे मांगे जाने के मामले भी प्रकाश में आए। स्थिति यहां तक हो गई के हंगामे के दौरान जब एक तीमारदार ने भाजपा विधायक को फोन पर जानकारी दी और विधायक ने मौके पर मौजूद फार्मेसिस्ट से प्रकरण की जानकारी करनी चाही तो फार्मेसिस्ट ने फोन पर बात करने से भी इंकार कर दिया। इमरजेंसी में कोई भी डॉक्टर मौजूद नहीं था। इसी को लेकर विवाद की शुरुआत हुई थी। इसको लेकर भाजपा नेताओं ने स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह और शासन को भी अवगत कराया था। भाजपा के पूर्व प्रदेश मंत्री राजेंद्र वार्ष्णेय चीफ और उनके प्रतिनिधि मंडल के सदस्यों ने इस संबंध में पूरी जानकारी स्वास्थ्य मंत्री को दी थी। साथ ही अस्पताल परिसर में बन रहे बिजली घर के निर्माण में प्रयोग हो रही घटिया सामग्री के संबंध में भी अवगत कराया था। इससे पहले राजेंद्र वार्ष्णेय चीफ ने अस्पताल में एंटी रैबीज इंजेक्शन न होने और दवाओं की भारी कमी होने की समस्या भी शासन और स्वास्थ्य मंत्री को बतायी थी। माना जा रहा है कि आम लोगों द्वारा की गई लगातार शिकायतें और भाजपा नेताओं से मिले फीडबैक के बाद मलखान सिंह जिला अस्पताल मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री के फोकस पर आ गया।