न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
राज्य विद्युत परिषद जूनियर इंजीनियर्स संगठन ने दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक को पत्र लिखकर कहा है कि बिजली विभाग में अपने सेवाकाल में परिषदीय नियमों के विरुद्ध कार्य में लिप्त रहे सहायक को रिटायरमेंट के बाद अनुचित रूप से संविदा पर विधिक सलाहकार के पद पर नियुक्त किया गया। जबकि उनकी योग्यता इंटरमीडिएट है। इस पद के लिए कानून में स्नातक होना जरूरी है। पत्र में पद पर रहते हुए अर्जित किए गए धन की जांच की मांग की गई है।
जूनियर इंजीनियर्स संगठन के अध्यक्ष राजवीर सिंह ने पत्र में कहा है कि विभाग में कार्यरत रवि शर्मा सितंबर 2012 को रिटायर हो गए। उनकी आयु 65 वर्ष से अधिक होने के बाद भी उन्हें उसी मंडल में विधिक सलाहकार के पद पर नियुक्ति किया गया जो कि विभागीय नियमों के विपरीत है।
पत्र में दावा किया है कि उनकी शैक्षिक योग्यता इंटरमीडिएट है। जबकि इस पद के लिए कानून में स्नातक होना जरूरी है। इसके अलावा इनके सेवा काल कई प्रकार की विवादित स्थितियां रहीं। इसके बाद भी इन्हें संविदा पर विधिक सलाहकार की भूमिका दी गई। इनके इस कार्यकाल की जांच की मांग की गई है।
‘यह सही है मैं एलएलबी नहीं हू। लेकिन इस पद के लिए एलएलबी जरूरी नहीं है। मैं विभाग के मामलों की पैरवी करता रहा हूं। जो लोग मेरी शिकायत कर रहे हैं मैंने उनके खिलाफ जांच बैठवा दी, इसलिए यह सब किया जा रहा है’ - रवि शर्मा, अनियमितता के आरोपी
‘बिजली विभाग में जो भी विधिक सलाहकार होगा उसके लिए एलएलबी यानि विधि में स्नातक होना अनिवार्य है। जो कानून ही नहीं जानता उससे विभाग क्या विधिक राय लेगा’
- सतवीर सिंह, एसडीओ क्वार्सी