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अलीगढ़ में बसपा से निष्कासित नेता कांग्रेस के संपर्क में

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बसपा से निष्कासित नेता कांग्रेस के संपर्क में
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।

हाल ही में बसपा से निष्कासित कुछ नेता कांग्रेस के संपर्क में हैं। हालांकि नेता सार्वजनिक रूप से कुछ कहने से बच रहे हैं, लेकिन अंदरखाने सियासत गरम है। निकट भविष्य में इनमें से कुछ नेता कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं। ये ठीक उसी तरह की सियासत है, जैसे वर्ष 2016 के विधानसभा चुनाव से पहले हुई थी। माना जा रहा है कि लोकसभा चुनाव 2019 से पहले कई पार्टियों के नेता पाला बदल कर इधर से उधर जाएंगे। क्योंकि इस चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच ही पूरे देश में मुकाबला माना जा रहा है, ऐसे में भाजपा विरोधी कांग्रेस का दामन थाम सकते हैं।

विधानसभा 2016 और इसके बाद वर्ष 2017 में कुछ बड़े नेताओं ने अचानक दल बदल लिया था। बसपा सुप्रीमो मायावती ने हाल ही में पूर्व मंत्री चौ. महेंद्र सिंह, अतरौली से विस चुनाव लड़े इलियास चौधरी, इगलास से चुनाव लड़े राजेंद्र सिंह और शहर से चुनाव लड़े आरिफ बॉबी अब्बासी को पार्टी से निकाल दिया है।
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- वर्तमान में 14 अप्रैल को होने वाले डॉ. भीमराव अंबेडकर का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाने में जुटे हैं। इसके लिए लगातार अलग-अलग कस्बों में बैठक कर रहे हैं। इससे ज्यादा अभी कुछ नहीं कहना है। -महेंद्र सिंह, पूर्व मंत्री बसपा से निष्कासित नेता।

- हम बहन मायावती के सिपाही हैं। हमेशा रहेंगे। उनका हर फैसला मानेंगे। इससे ज्यादा कुछ नहीं कहना। कांग्रेस या किसी और पार्टी में जाने का सवाल नहीं उठता है। -आरिफ बॉबी अब्बासी, बसपा से निष्कासित नेता।

- हम बहन मायावती के सिपाही हैं और हमेशा रहेंगे। बसपा में काम किया है और यहीं करेंगे। हमारी पूरी आस्था बहन जी में है। किसी दूसरी पार्टी में जाने का सवाल नहीं उठता। -राजेंद्र कुमार, बसपा से निष्कासित नेता।

- मेरी पूरी आस्था बहन मायावती और बसपा में है। मैं किसी और पार्टी में जाने की नहीं सोच रहा हूं। इसी पार्टी के लिए काम करता रहूंगा। -इलियास चौधरी, बसपा से निष्कासित नेता।

क्या कहते हैं कांग्रेसी
- हम अभी किसी का नाम नहीं खोल सकते हैं, लेकिन कुछ ही दिनों में कई पार्टियों के लोग कांग्रेस में शामिल होंगे। आप सब देखेंगे। -चौ. बिजेंद्र सिंह, कांग्रेस जिलाध्यक्ष।

- कई पार्टियों के नेता लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में शामिल होने का मन बना रहे हैं। उनसे वार्ता हो रही है। सब कुछ जल्द ही तय होगा। - विवेक बंसल, कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव।

बसपाई बोले...
बसपा से किसी के कांग्रेस में शामिल होने की कोई जानकारी नहीं मिली है। हमारी पार्टी सबसे मजबूत स्थिति में है। -तिलकराज यादव, बसपा जिलाध्यक्ष।

2016 और 2017 का अतीत
बताता है दल बदलने के तीन सच

जिस तरह से आज बसपा से निष्कासित नेता सुप्रीमो मायावती में पूरी आस्था व्यक्त कर खुद को पार्टी का सिपाही कह रहे हैं। ठीक उसी तरह से पूर्व में दल बदलने वाले भी ऐसे ही कसमें खाते रहे हैं। वर्ष 2016 और 2017 के तीन ऐसे सच आपकी यादें ताजा कराएंगे...।

पहला सच... बसपा से निष्कासित नेताओं की तर्ज पर ही बरौली विधानसभा से रालोद के पूर्व विधायक रहे ठा. दलवीर सिंह भी कहते थे कि वह उम्र के इस पड़ाव में रालोद छोड़ कर भाजपा में नहीं जाएंगे। कई बार उनके भाजपा में शामिल होने की जबरदस्त चर्चा हुई। आरएसएस से उनके गहरे संबंधों पर बात हुई। अमर उजाला के एक विशेष साक्षात्कार में उन्होंने खुद स्वीकार किया कि वो भाजपा नेता राजनाथ सिंह से मिले भाजपा से नहीं, लेकिन जनवरी 2017 में अचानक वह भाजपा में शामिल हुए और बरौली विधानसभा से भाजपा के टिकट पर चुनाव जीत कर वर्ष 2017 में विधायक बने।

ठा. दलवीर सिंह के कट्टर राजनीतिक विरोधी रहे बसपा के पूर्व कबीना मंत्री एवं एमएलसी ठा. जयवीर सिंह के भाजपा में शामिल होने की चर्चा वर्ष 2016 के अंत में शुरू हो गई थी। वर्ष 2017 में भी ये बात उठी, लेकिन ठा. जयवीर सिंह और उनके समर्थक इंकार करते रहे लेकिन जिला पंचायत अध्यक्ष एवं उनके भतीजे उपेंद्र सिंह नीटू की कुर्सी जब खतरे में आई तो पूर्व मंत्री पूरे परिवार के साथ जुलाई 2017 में भाजपा में शामिल हो गए।
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वर्ष 2016 के विधानसभा चुनाव में कोल विस क्षेत्र का टिकट नहीं मिलने पर सपा से बागी हुए दो बार के विधायक हाजी जमीरउल्लाह 20 अगस्त 2017 को बसपा में शामिल हुए थे। जिसकी पहली खबर अमर उजाला ने ही 10 सितंबर 2017 के अंक में प्रकाशित की थी। वर्ष 2017 में अचानक पलटा मार कर दल बदलने की ये तीनों राजनीतिक घटनाएं जिले की सियासत में सबसे ज्यादा चर्चा में रहीं।
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