न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
प्रख्यात इतिहासकार प्रो. इरफान हबीब ने कहा कि राष्ट्रीय आंदोलन में एएमयू का महत्वपूर्ण योगदान है।
प्रो. इरफान मंगलवार को एएमयू के यूनियन हॉल में छात्र संघ द्वारा एमएओ कॉलेज की स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। 8 जनवरी 1877 को तत्कालीन वायसरॉय लार्ड लिटन ने एमएओ कॉलेज की नींव रखी थी, जो 1920 में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी बन गया। जिस जगह पर लार्ड लिटन ने नींव रखी थी, वह आज एएमयू के सुंदर भवनों (हेरिटेज बिल्डिंग) में शामिल स्ट्रेची हॉल के रूप में मशहूर है। प्रो. इरफान हबीब ने एएमयू के इतिहास एवं राष्ट्रीय आंदोलन में उसकी भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला।
इस दौरान उन्होंने कहा कि गोपाल कृष्ण गोखले जब अलीगढ़ आए थे तो छात्रों ने उनकी बग्धी को खींचकर लाया था। उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी हसरत मोहाली आदि के कारनामों से भी छात्रों को अवगत कराया। इस क्रम में गोखले एवं तिलक की तस्वीर कमरे में लगाने के लिए एक छात्र को अंग्रेजों द्वारा जेल में डाले जाने का भी उल्लेख किया। एएमयू उर्दू अकादमी के डायरेक्टर डॉ. राहत अबरार ने कहा कि एएमयू के इतिहास में पहली बार छात्र संघ द्वारा फाउंडर्स डे मनाया जा रहा है। इसके लिए छात्र संघ के पदाधिकारी धन्यवाद के पात्र है।
उन्होंने कहा कि सर सैयद ने उदारता, सहिष्णुता, स्वतंत्र चिंतन एवं शुद्ध नैतिकता पर विशेष जोर दिया। आज छात्रों को चिंतन करना चाहिए कि हम सर सैयद के आदर्श पर चल रहे हैं। कार्यक्रम को एएमयू छात्र संघ के अध्यक्ष सलमान इम्तियाज एवं सचिव हुजैफा आमिर आदि ने भी संबोधित किया। वीमेंस कॉलेज स्टूडेंट यूनियन की पदाधिकारी भी कार्यक्रम में मौजूद थी।