न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
अब जिले के हर सीएचसी पर कुपोषित बच्चों के लिए चार बेड आरक्षित रहेंगे। कुपोषण से रविवार को मेडिकल कालेज में भर्ती आठ माह की मासूम भावना की मौत के बाद जिला प्रशासन और सतर्क हो गया है। पूर्व डीएम ऋषिकेश भास्कर याशोद के गोद लिए गांव बरकातपुर की इस बच्ची का पिछले छह-सात दिनों से मेडिकल कालेज में इलाज चल रहा था। बच्ची की मां को प्रधानमंत्री आवास दिलाने के लिए बीडीओ को उनका नाम लाभार्थियों की सूची में डलवाने को कहा गया है तो विधवा पेंशन के लिए उनका आवेदन करा दिया गया है। जल्द ही उसके घर में मुफ्त शौचालय का निर्माण भी कराये जाने की घोषणा की गई है।
भावना के परिवार के साथ है प्रशासन : डीएम
बच्ची भावना की मौत से आहत डीएम चंद्रभूषण सिंह ने कहा है कि बच्ची कई माह से एनआरसी की देखरेख में उपचाराधीन थी। उसका मेडिकल में भी मुफ्त इलाज कराया गया लेकिन दुर्भाग्यवश उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। बच्ची के परिवार की मदद के लिए उसकी मां शशि को विधवा पेंशन, अंत्योदय राशन कार्ड के जरिए 35 किलो अनाज, प्रधानमंत्री आवास एवं मुफ्त शौचालय भी बनवाया जाएगा।
यह था मामला
गांव बरकातपुर निवासी मनोज की चार बेटियां थी। सात वर्षीय रानी, चार वर्षीय प्रियंका, दो वर्ष की सलोनी एवं आठ माह की भावना। बताया जाता है कि भावना बचपन से ही कुपोषण का शिकार थी। चार माह की होने के बाद कुपोषण की लाल सूची में शामिल भावना को एनआरसी यानी पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराया गया था। यहां उसे 14 दिन रखा गया। यहां रहने के दौरान उसके वजन में करीब 150 ग्राम की बढ़ोत्तरी हुई।
इसके बाद उसे डिस्चार्ज कर परिजनों को हर 15 दिन में एनआरसी आकर बच्ची की जांच कराने को कहा गया। इस अति गरीब परिवार के मुखिया मनोज की कुछ समय पहले मृत्यु हो गई। बच्ची की मां शशि ने बताया कि पहले तो वह अकेली ही बच्ची को मेडिकल कालेज ले गई, लेकिन जब पैसे का अभाव इलाज में रोड़ा बना तो उसने अफसरों को जानकारी दी। डीपीओ श्रेयस कुमार ने बताया कि जानकारी मिलते ही हमने अस्पताल प्रशासन से संपर्क कर उसे आईसीयू में भर्ती कराया और मुफ्त इलाज कराकर बचाने की कोशिश की। लेकिन रविवार को उसने दम तोड़ दिया। भावना और भाई बहनों के जन्म में पर्याप्त अंतर नहीं होने से वह कुपोषण का शिकार हुई थी।
बड़ी बहन सलोनी का भी कराया था इलाज
डीपीओ ने बताया कि भावना की बड़ी बहन फरवरी माह में जल गई थी। हमने उसका मुफ्त में मेडिकल में ट्रीटमेंट कराया और वह सही भी हो गई। भावना को भी बचाने का भरसक प्रयास किया गया, लेकिन अति कुपोषित होने की वजह से उसे बचाया नहीं जा सका।