न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
भ्रामक विज्ञापन जारी करने के मामले में वेक्यूम क्लीनर बनाने वाली विश्व प्रसिद्ध कंपनी मैसर्स यूरेका फोर्ब्स लिमिटेड मुंबई एवं मैसर्स जेसीबी लिमिटेड फरीदाबाद कंपनी फंस गई हैं। विधिक माप विज्ञान विभाग ने दोनों कंपनियों पर क्रमश: 1.30 लाख एवं 2.75 लाख रुपये का जुर्माना वसूल किया है।
वरिष्ठ निरीक्षक हरीश कुमार प्रजापति ने 17 नवंबर 2017 को मैसर्स जेसीबी लिमिटेड फरीदाबाद ने विज्ञापन प्रकाशित कराया था कि जेसीबी मशीन खरीदने पर एलईडी टीवी मुफ्त दिया जाएगा। किंतु इस विज्ञापन में मुफ्त दिए जाने वाले टीवी का साइज मानक इकाई में नहीं बताया गया था।
बताते चलें कि बाजार में अलग-अलग साइज के एलईडी टीवी उपलब्ध हैं। उनका मूल्य स्क्रीन के साइज के आधार पर होता है। इसमें लाखों रुपये का अंतर पाया जाता है। ऐसे में विज्ञापन को भ्रामक मानते हुए कंपनी को 22 नवंबर 2017 को नोटिस जारी किया गया।
जवाब न देने पर 27 दिसंबर 2017 को एक और नोटिस जारी करते हुए कंपनी के कुल 11 आरोपियों के खिलाफ अग्रिम कार्रवाई की चेतावनी दी गई। जवाब मिलने पर कंपनी के 11 अफसरों पर 25-25 हजार रुपया प्रति व्यक्ति के हिसाब से 2.75 लाख रुपया जुर्माना लगाया गया। इसे कंपनी ने जमा करा दिया।
इसी प्रकार 17 दिसंबर 2017 को मैसर्स यूरेका फोर्ब्स लिमिटेड मुंबई की वेबसाइट पर जारी सूचनाओं को चेक किया गया। कंपनी ने अपने उत्पाद एयरोगार्ड क्लीन इंडोर के संबंध में कानून के विरुद्घ अमानक माप इकाई एसक्यूएफटी का प्रयोग होता पाया गया। 19 दिसंबर को कंपनी को नोटिस जारी किया गया।
कंपनी ने मामले के निस्तारण के लिए आवेदन किया। सहायक नियंत्रक ने मामले में कंपनी के 13 अफसरों को दोषी ठहराते हुए 10-10 हजार रुपया प्रति व्यक्ति के हिसाब से कुल 1.30 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। इसे कंपनी ने जमा कर दिया। कार्रवाई के दौरान वरिष्ठ निरीक्षक राम सुंदर अकेला भी उपस्थित थे।