फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सभी भाषाएं वंदनीय हैं, पर मातृभाषा पूजनीय है

विज्ञापन
विज्ञापन
सभी भाषाएं वंदनीय हैं, पर मातृभाषा पूजनीय है
विज्ञापन


ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।

हिंदी दिवस पर शैक्षणिक, सामाजिक संस्थाओं में गोष्ठी, भाषण प्रतियोगिता सहित कई कार्यक्रम आयोजित किए गए। हिंदी की प्रगति और उत्थान पर बातें की गईं। वहीं, हिंदी के रसातल में जाने की मूल वजह भी बताई गईं। हिंदी का पताका लेकर चल रहे मनीषियों को सम्मानित भी किया गया।

हिंदी को आत्मसात कर कामकाज की भाषा में उतारें : जिला जज
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में सिविल कोर्ट के पुस्तकालय भवन में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। शुभारंभ प्राधिकरण अध्यक्ष जिला जज कल्पना मिश्रा ने मां सरस्वती के चित्र के सामने दीप जलाकर किया। जिला जज ने बताया कि हिंदी को आत्मसात करने और कामकाज में उतारने की जरूरत है। हिंदी जन-जन की भाषा हो ऐसे प्रयास हम सभी को करने चाहिए। अपर जिला जज प्रथम मदन लाल निगम ने कहा कि हिंदी को अपनाने में हमारी करनी और कथनी में अंतर नहीं होना चाहिए। अपर जिला जज (नौ) नसीम अहमद ने कहा कि जनमानस को भाने वाली भाषा ही जीवंत रहती है। दि अलीगढ़ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अमर सिंह यदुवंशी ने कहा कि हिंदी को सम्मान दें, क्योंकि सम्मान से बढ़ावा मिलता है और इसे अपने परिवार से शुरू करें। प्राधिकरण के सचिव अभिनितम उपाध्याय ने कहा कि सभी भाषाएं वंदनीय हैं और मातृभाषा पूज्यनीय है। भाषा यदि मूलभूत आवश्यकताओं जैसे रोटी, कपड़ा और मकान को पूरा कर सकती है, तो स्वत: ही विकसित हो जाएगी। तब जाकर हमारा यह सपना पूर्ण होगा कि ‘दुनिया हमारी ओर देखे’। कार्यक्रम में सिविल बार अध्यक्ष सूरज पाल, भूदत्त मिश्र, सुरेंद्र मोहन यादव, पूनम बजाज, एचएम सिंह, रामनरेश सिंह चौहान, शाजिया ने भी विचार रखे। संचालन प्राधिकरण अपर जिला जज सुरेश चंद्र ने किया। कार्यक्रम में समस्त न्यायिक अधिकारी, अधिवक्ता हरिओम वार्ष्णेय, शबनम, सुमनलता, संधिकर्ता एवं पराविधिक स्वयं सेवकों ने सहभागिता की।
विज्ञापन

यहां भी आयोजित हुए कार्यक्रम
एसवी कॉलेज : बीएड विभाग में हिंदी भाषा प्रशिक्षक डॉ. वीपी पांडेय ने कहा कि राष्ट्र भाषा के लिए अधिकृत हिंदी भाषा को व्यवहारिक रूप से प्रयोग करने वाले हम हिंदी भाषी सुशिक्षित लोग ही कर रहे हैं। यहां छात्रा प्राची, अरविंद, पूनम कुमारी, वेद प्रकाश, रजनी, रेखा रानी, विक्रम, रवींद्र आदि मौजूद रहे। हिंदी विभाग में डॉ. योगेंद्र सिंह राजपूत, डॉ. राकेश कुमार, विभागाध्यक्ष डॉ. रमेश कुमार, सोनपाल सिंह, छात्रा निशा, दुर्गेश, ममता, लक्ष्मी, विनीत, दीक्षा, राखी, सुनीता, लीना, नीलम आदि मौजूद रहे।
आईआईएमटी: इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फार्मेशन मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी के शिक्षक-शिक्षा संकाय में हिंदी महोत्सव का शुभारंभ विभागाध्यक्षा डॉ. अंजू सक्सेना ने किया। इस मौके पर इग्नू समन्वयक डॉ. गोविंद वार्ष्णेय, डॉ. एसएफ उस्मानी, डॉ. सुनील चौहान, डॉ. सुमनलता गौतम, आकांक्षा चौहान, मधु चाहर, शिखा चौहान, चमन शर्मा ने विचार व्यक्त किए।

इग्नू क्षेत्रीय केंद: इग्नू क्षेत्रीय केंद्र मैरिस रोड में एएमयू के हिंदी विभाग में सगोष्ठी आयोजित की गई। जिसमें अनोखे सिंह आईआईएमटी प्रथम, दिशू कुमार शर्मा द्वितीय, सिराली परवीन ज्ञान महाविद्यालय ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। इस मौके पर प्रो. शाहुल हमीद, क्षेत्रीय निदेशक डॉ. एमआर फैसल, अनुभाग अधिकारी रविकांत, डॉ. गोविंद वार्ष्णेय, सत्येंद्र सिंह कुशवाहा आदि मौजूद रहे।
मदर टेरेसा वीमेंस कॉलेज: मदर टेरेसा वीमेंस पीजी कॉलेज में प्रीति, मयूरी, कुमकुम, दीप्ती, दया, कीर्ति, वैशाली, उमांशी, कालिंदी ने कविता पाठ किया। इस मौके पर प्राचार्या डॉ. स्वर्णलता याज्ञनिक, नीरज सिंह, श्वेता मिश्रा, सीमा शर्मा, डॉ. आराधना मिश्रा, डॉ. अनंता शांडिल्य, धरती पाठक ने भी विचार व्यक्त किए।
पीएम कॉलेज ऑफ एजूकेशन: पीएम कॉलेज ऑफ एजूकेशन करसुआ में ‘हिंदी एवं अन्य क्षेत्रीय भाषाओं के मध्य द्वंद्व’ पर निबंध प्रतियोगिता व ‘वर्तमान समय में हिंदी की प्रासंगिकता’ विषय पर भाषण प्रतियोगिता हुई। इस मौके पर संस्थापक अजीत सिंह तोमर, प्राचार्या डॉ. विनीता प्रकाश, निम्मी सिंह, दिशा माहौर, जमील अशरफ, डॉ. लोकेंद्र सिंह, डॉ. चंद्रेश्वर सिंह, जगदंबे शर्मा, रंजना वार्ष्णेय, कल्पना रानी, नम्रता सक्सेना आदि थे।

पंकज धीरज को हिंदी गौरव सम्मान
हिंदी माला संगोष्ठी व सम्मान समारोह का आयोजन नई दिल्ली के गांधी शांति प्रतिष्ठान में किया गया। मुख्य अतिथि केंद्रीय मंत्री नरेंद्र तोमर ने राजभाषा हिंदी के संवर्धन में विशेष सहयोग देने के लिए पत्रकार पंकज धीरज को ‘हिंदी गौरव’ सम्मान से सम्मानित किया। वहीं, हिंदी प्रेमी रतन वार्ष्णेय, नरेंद्र धवन, पीतवास मिश्र, पीसी अग्रवाल, डा.ॅ सुशील दाहिमा, प्रहलाद अग्रवाल, नंदगोपाल वर्मा को सम्मानित किया गया।
अर्थ सोसाइटी: अर्थ सोसाइटी के कार्यक्रम में सचिव रूही खान, मोहम्मद जीशान, शगुफ्ता परवीन, अथर मोहम्मद आदि मौजूद रहे।
पूर्व राष्ट्रपति डॉ. कलाम का हिंदी प्रेम
विज्ञानरत्न लक्ष्मण प्रसाद ने अपने अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि उनकी नवाचार से संबंधित पहली अंग्रेजी की पुस्तक ‘मेकिंग इंडिया इनोवेटिव’ का विमोचन उनके कर-कमलों द्वारा विज्ञान भवन, नई दिल्ली में 2 जनवरी, 2001 को किया गया। पुस्तक की प्रशंसा करते हुए डॉ. कलाम ने उन्हें सलाह दी कि भविष्य में वे विज्ञान एवं नवाचार से संबंधित पुस्तकें हिंदी में लिखें, जिससे आम जनता को लाभ मिलेगा। डॉ. कलाम के निर्देशों का पालन करते हुए पिछले 16 सालों में विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार पर 15 पुस्तकें हिंदी में लिखी हैं और उनको देश के प्रतिष्ठित प्रकाशकों ने प्रकाशित किया है। पिछले 15 वर्षों में उन्होंने विज्ञान से संबंधित लगभग 50/60 लेख हिंदी में लिखे हैं और जो अनेक विज्ञान से संबंधित प्रमुख हिंदी पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं। इस अवधि में उन्होंने केवल एक ही पुस्तक ‘मेकिंग इंडिया इनोवेटिव’ अंग्रेजी में लिखी है।
क्षेत्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान संस्थान: एएमयू के हिंदी विभाग के प्रोफेसर अजय बिसारया ने संस्थान के मैदान में हिंदी और उर्दू का इतिहास पर प्रकाश डाला। इस मौके पर जॉनी फॉस्टर, हिंदी सलाहकार वित्त मंत्रालय भारत सरकार क्षेत्रपाल शर्मा, डॉ. आमिर अब्बास, डॉ. शारिक अली खान, संस्थान के प्रभारी उप निदेशक डॉ. सरफराज अहमद, डॉ. फखरे आलम, डॉ. राधे श्याम वर्मा, डॉ. परवेज खान आदि थे।
ज्ञान महाविद्यालय: सभागार में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि कवि हरीश बेताब, कवि श्री ओम वार्ष्णेय, वतन शहजादा ने रचना पढ़ी। इस मौके पर प्राचार्य डॉ. वाईके गुप्ता, उप प्राचार्य डॉ. हीरेश गोयल, डॉ. वीना अग्रवाल, डॉ. नरेंद्र सिंह, डॉ. विनोद वर्मा, डॉ. विवेक मिश्रा, एचओडी आभा कृष्ण जौहरी आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन

हिंदी दिवस के लिए नहीं मिला बजट: एसवी कॉलेज में हिंदी दिवस पर होने वाले कार्यक्रम के लिए बजट नहीं मिला है। हालांकि, हिंदी विभाग व बीएड विभाग ने अपने-अपने विभाग में कार्यक्रम किए हैं। हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉ. रमेश कुमार का कहना है कि तत्कालीन प्राचार्य डॉ. दीक्षित ने हिंदी दिवस के कार्यक्रम के लिए बजट दिया था, लेकिन पिछले वर्ष प्राचार्य डॉ. गोपाल बाबू ने बजट देने के लिए मना कर दिया था। इसलिए इस बार उनसे संपर्क नहीं किया गया। उधर, प्राचार्य डॉ. गोपाल बाबू का कहना है कि उनसे बजट के लिए संपर्क नहीं किया गया। भला वह मना क्यों करेंगे। विद्यार्थियों के कल्याण व हित के लिए होने वाले कार्यक्रम में बजट न देने का सवाल ही पैदा नहीं होता।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें