न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
शब-ए-बरात का त्योहार शनिवार को मनाया जाएगा। मस्जिदों व घरों में खुदा की इबादत की जाएगी। कुरान की तिलावत होगी। वहीं, रविवार को भोर में कब्रिस्तान में बिछड़े लोगों की कब्रों पर खिराजे अकीदत पेश की जाएगी।
मुस्लिम कैलेंडर के मुताबिक शाबान महीने की 14 तारीख को शब-ए-बरात मनाई जाती है। शब-ए-बरात दो शब्दों से शब और बरात से मिलकर बना है। शब का मतलब रात है, जबकि बरात का मतलब बरी है। जैसे गुनाह, चुगलखोरी, झूठ, चोरी से बरी होना है। शाबान महीने की 14 तारीख (शनिवार) को सूरज डूबने के बाद शुरू होती है। शहर मुफ्ती मोहम्मद खालिद हमीद ने बताया कि शाबान महीने की 14 तारीख की रात बेहद फजीलत (महत्वपूर्ण) रात मानी जाती है। इस रात को मुस्लिम अल्लाह की इबादत करते हैं। वह दुआ मांगते हैं और अपने गुनाहों की तौबा करते हैं। मस्जिदों व घरों में सजावट की जाती है।