न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
देश दुनिया में अपने कड़वे प्रवचनों के लिए प्रसिद्ध क्रांतिकारी संत मुनि तरुण सागर महाराज के निधन पर जैन समाज में शोक की लहर दौड़ गई। बाबूलाल जैन इंटर कालेज में एक शोक सभा भी हुई। इसमें समाज के लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए उनके जीवन पर प्रकाश डाला।
राजीव जैन ने बताया कि छह जून 2014 को अलीगढ़ के उनके कड़वे प्रवचन हुए थे। प्रवचन सुनने के लिए जैन समाज के ही नहीं बल्कि अन्य समाज के लोग भी बड़ी संख्या में आए थे। राजीव जैन ने कहा कि तरुण सागर महाराज कड़वे प्रवचनों के जरिए मीठी बात कहते थे। उनका जन्म 26 जून 1967 में मध्य प्रदेश के दमोह जिले के गुहंची गांव में हुआ था। इनके गुरू पुष्पदंत सागर महाराज थे। 20 जुलाई 1988 को बागीदौर राजस्थान में अपने गुरु से मुनि दीक्षा ली।
13 वर्ष की उम्र में संयास लेकर 20 वर्ष की उम्र में दिगंबर मुनि की दीक्षा ली और 33 वर्ष की उम्र में लाल किले से राष्ट्र को संबोधित किया। इतना ही नहीं 35 वर्ष की उम्र में राष्ट्रसंत की पदवी से विभूषित हुए। 37 वर्ष की उम्र में गुरु मंत्र दीक्षा देने की नई परंपरा की शुरुआत की। कपड़े प्रवचनों पर तीन दर्जन से अधिक पुस्तकों की 10 लाख प्रतियां अब तक बिक चुकी हैं। उन्होंने भारतीय सेना को संबोधित कर जैन समाज का नाम भी रोशन किया। इसके साथ ही लिम्का बुक, गिनीज वर्ल्ड रिकार्ड भी बनाया।
इधर, बाबूलाल जैन इंटर कालेज में हुई शोक सभा में प्रधानाचार्य अंबुज जैन, नरेश कुमार जैन, प्रदीप जैन, मनीष जैन, दिलीप जैन, पीसी शर्मा, विनोद बाबू, सौरभ जैन, प्रदीप जैन, मोहित जैन, राहुल जैन, राकेश सिंह, संतोष कुमार, विनोद कुमार गौतम, नरेश कुमार जैन मौजूद थे।