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बजट नहीं होने से फेल हुई सांसद आदर्श ग्राम योजना

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
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लोकसभा सदस्य (सांसद) को वर्तमान में पांच साल के कार्यकाल में 25 करोड़ रुपये की सांसद निधि मिल रही है, यानी हर साल केवल पांच करोड़ रुपये। अलीगढ़ लोकसभा में गांव और माजरा मिला दें तो लगभग 1980 गांव आते हैं।

इन गांवों में अगर पांच साल की 25 करोड़ रुपये की पूरी सांसद निधि को लगा दिया जाए तो हरेक गांव के हिस्से में पूरे पांच साल में महज एक लाख 26 हजार 262 रुपये आते हैं। इस एक लाख 26 हजार 262 रुपये से गांव में एक भी गली नहीं बन सकती है। ये भी सच है कि पूरी सांसद निधि को केवल गांवों में या किसी एक काम में भी खर्च नहीं किया जा सकता है।
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सांसद सतीश गौतम ने सांसद आदर्श ग्राम योजना में अपनी निधि से जो सोलर स्ट्रीट लाइट लगवाई हैं। उनकी कीमत भी लगभग दो दो लाख रुपये के बीच बैठती है। इस एक लाइट की कीमत लगभग 18 हजार रुपये बताई जाती है। हरेक आदर्श ग्राम में दस से बारह लाइट लगी हैं, जिसमें सांसद निधि से लगभग दो-दो लाख रुपये खर्च किए गए हैं।

बाकी सांसद निधि को अलग-अलग विकास कार्यों और जनता की मांग के अनुसार खर्च किया गया है। सांसद आदर्श ग्राम योजना का अलग से कोई बजट नहीं है। इसी वजह से ये योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आदर्श ग्राम योजना के सपने को साकार नहीं कर पाई।

इससे उलट बसपा सुप्रीमो मायावती की आंबेडकर गांव योजना में एक करोड़ या उससे भी ऊपर का बजट मिल जाता था। इसी तरह से सपा की अखिलेश यादव सरकार की लोहिया गांव योजना में 35 लाख रुपये का बजट कई काम करा देता था।
आंबेडकर गांव में एक एक करोड़ रुपये से बनी थी सड़कें
डा. आंबेडकर ग्रामीण समग्र विकास योजना पूर्व सीएम एवं बसपा सुप्रीमो मायावती के कार्यकाल में शुरू हुई थी। जिसमें एससी एसटी बाहुल्य आबादी वाले गांव चुने जाते थे। इन गांवों में हरेक सड़क सीसी बनाई जाती थी। उसके लिए खर्च होने वाली रकम का बजट अलग से दिया जाता था। ये रकम एक करोड़ रुपये या उससे ऊपर भी पहुंच जाती थी। सभी सड़कों को सीसी करने के बाद विद्युतीकरण, गांव के प्रमुख संपर्क मार्ग, स्कूलों की मरम्मत, शौचालय निर्माण, पेंशन वितरण, आवास और सौर ऊर्जा लाइट की व्यवस्था अलग से होती थी। इसीलिए इस योजना में चयनित गांव कुछ ही दिनों में नये स्वरूप में आ जाता था।

लोहिया गांव में 35 तो जनेश्वर मिश्र गांव को 40 लाख मिलते थे
प्रदेश में सपा के पूर्व प्रमुख मुलायम सिंह यादव और वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राम मनोहर लोहिया समग्र ग्राम विकास योजना में 35 लाख और जनेश्वर मिश्र ग्राम विकास योजना में 40 लाख रुपये का बजट दिया गया। उक्त योजनाओं को चलाने के दौरान मायावती सरकार की डा. आंबेडकर ग्रामीण समग्र विकास योजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। राम मनोहर लोहिया समग्र ग्राम विकास योजना में 35 लाख और जनेश्वर मिश्र ग्राम विकास योजना में 40 लाख रुपये का बजट देने के बाद विद्युतीकरण, गांव के प्रमुख संपर्क मार्ग के निर्माण, स्कूलों की मरम्मत, शौचालय निर्माण, पेंशन वितरण, आवास और सौर ऊर्जा लाइट की व्यवस्था अलग से होती थी।
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सांसद आदर्श ग्राम योजना में चयनित गांव बहरावद, सौंगरा और बसेरा में जो विकास कार्य किए जाने हैं वो यकीनन पूरे होंगे। इस योजना में कोई बजट नहीं होने के कारण इन कामों को पूरा कराने में देरी हो रही है। इस संबंध में केंद्र सरकार के अलग-अलग मंत्रालयों और प्रदेश सरकार के कई विभागों को पत्र देकर सूचित किया गया है। अब वहां से जवाब आने शुरू हो गए हैं। जल्द ही पैसा भी मिलेगा और काम शुरू हो जाएगा। एक वजह ये भी रही कि वर्ष 2014 में जब ये गांव चुने जाने शुरू हुए थे। उस वक्त प्रदेश में सपा सरकार थी, जो वर्ष 2017 तक सत्ता में काबिज रही है। ये तीन वर्ष का समय केवल सपा सरकार की मानसिकता वाले अफसरों से जूझने में गुजर गए। वर्ष 2017 में प्रदेश में भाजपा सरकार बननेे के बाद से अब केंद्र और प्रदेश दोनों सरकारों का तालमेल बेहतर हुआ है। अब विकास ने रफ्तार पकड़ी है। हमने अपनी सांसद निधि का एक-एक रुपया जनहित में खर्च किया है जिसका पूरा हिसाब किताब मौजूद है। हर संभव प्रयास कर सांसद आदर्श ग्राम योजना के गांवों के साथ दूसरे गांवों का भी विकास कराया जाना तय है। इसमें कोई भ्रम नहीं है।
-सतीश गौतम, सांसद
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