क्राइम न्यूज, अमर उजाला, अलीगढ़।
सत्र न्यायाधीश पीके सिंह के न्यायालय से प्रेमिका व उसके सहयोगियों द्वारा किए गए आर्थिक शोषण से तंग आकर प्रेमी द्वारा सुसाइड के मामले में प्रेमिका की जमानत खारिज की गई है। आरोपी युवती मूल रूप से मेरठ की रहने वाली है और जीआरपी अलीगढ़ में दर्ज मुकदमे में वह जिला कारागार में निरुद्ध है।
अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता डीजीसी डॉ. अबसार किदवई के अनुसार बुलंदशहर के औरंगाबाद थाना क्षेत्र के गांव बिसुंधरा निवासी मोनू कुमार की ओर से जीआरपी अलीगढ़ थाने में दर्ज कराई गई रिपोर्ट में कहा गया कि उसके भाई शैलेंद्र के पिछले करीब 5 साल से निधि सिसौदिया निवासी गावड़ी पछगांव गढ़ रोड थाना भावनपुर मेरठ से संबंध थे।
निधि ने अपनी मां बाला देवी व अन्य नामजद अमित और अमित की पत्नी की मदद से शैलेंद्र को अपने जाल में फंसाकर उसका आर्थिक शोषण किया था। 4 मार्च 2017 को उसे मेरठ बुलाकर उससे मारपीट कर 2 लाख रुपये मांगे। इसके बाद घटना से 45 दिन पूर्व निधि का भाई शैलेंद्र से 1 लाख रुपये ले गया।
इसी उत्पीड़न से तंग आकर शैलेंद्र ने 7 मार्च को चोला व वैर के मध्य ट्रेन के आगे कूदकर खुदकुशी कर ली। इस मुकदमे में पुलिस ने निधि को जेल भेजा था। अब उसके अधिवक्ता की ओर से जमानत अर्जी दायर की गई, जिसे सत्र न्यायालय ने खारिज कर दिया।
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