आखिर कब शहरी कहलाएंगे धौर्रामाफी के लोग
ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़।
एशिया के सबसे धनाढ्य और शिक्षित लोग अभी भी गांव में रहते हैं। चौंकने की आवश्यकता नहीं है महानगर का धौर्रामाफी अभी भी ग्राम पंचायत है। नगर निगम के चुनाव में वोट न देने का दर्द रविवार को धौर्रामाफी ग्राम पंचायत में रहने वालों के चेहरे पर स्पष्ट दिखाई दिया।
अलीगढ़ मुस्लिम विश्व विद्यालय के कालेज की बाउंड्री और नगर निगम की सीमा पर बसे गांव धौर्रामाफी के लोग अब अपने आप को ग्रामीण कहलवाना नहीं चाहते हैं। नगर निगम के परसीमन में उन्हें पूरी उम्मीद थी कि इस बार उनकी ग्राम पंचायत नगर निगम की सीमा में आ जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। जब परसीमन का कार्य समाप्त हुआ तो उन्हें निराशा हाथ लगी। स्थानीय लोगों का कहना है कि धौर्रामाफी एशिया का ऐसा पहला गांव कहलाता है। जहां सबसे ज्यादा धनाढ्य तथा शिक्षित लोग रहते हैं। बावजूद इसके उन्हें अभी भी ग्रामीण ही कहा जाता है, क्योंकि उनकी ग्राम पंचायत नगर निगम की सीमा से बाहर है। नगर निगम के चुनाव में चाय वाले से लेकर प्रोफेसर और डाक्टर तक के चेहरे पर यह दर्द दिखायी दिया। हालांकि कुछ लोगों ने अपने दिल को यह कहते हुए तसल्ली दी कि इस बार नहीं तो शायद अगली बार तो पक्का उन्हें नगर निगम के चुनाव में मेयर और पार्षद चुनने का अधिकार मिल ही जाएगा। कुछ लोगों ने अपने दिल को यह तसल्ली देकर मनाया कि यदि नगर निगम में ग्राम पंचायत आ जाती तो हाउस, सर्विस, वाटर के साथ तमाम तरह के टैक्स भी देने पड़ते।
बाक्स
साक्षरता दर: 100 प्रतिशत
आबादी: 30 हजार के करीब
मतदाता: 12 हजार के करीब
ग्राम पंचायत के चुनाव: दिसंबर 2015
फोटो
यदि नगर निगम में ग्राम पंचायत आ जाती तो सफाई, पानी, बिजली की सुविधा मिलती। सफाईकर्मी नियमित रूप से सफाई के लिए आते। सड़के पक्की हो जाती, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। हालांकि नगर निगम में यह क्षेत्र न आने पर हाउस टैक्स समेत कई टैक्स से बचे हुए हैं।
- बाबू पुत्र तुफैल, चाय विक्रेता धौर्रामाफी
फोटो
ग्राम पंचायत को नगर निगम की सीमा में आना चाहिए था। परसीमन के दौरान अखबारों में खबरें छपी तो मुझे बड़ी खुशी हुई, लेकिन बाद में पता नहीं क्या हुआ, नगर निगम की सीमा में गांव नहीं आया। यहां टैक्स देने वालों की कमी नहीं है। बस सुविधा मिलनी चाहिए।
- सरवत नजीर, धौर्रामाफी
फोटो
भारत गांव में बसता है यदि यह गांव नगर निगम में आ जाएगा तो एशिया में सबसे शिक्षिक और धनाढ्य लोगों के रहने का खिताब भी छिन जाएगा। हमें नगर निगम की सीमा में नहीं आना है, बल्कि सरकार हमें सुविधाएं मुहैया कराए, ताकि इस गांव को मॉडल गांव के रूप में बनाकर विख्यात किया जा सके
- खालिदा, ग्राम पंचायत प्रधान