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12 हत्यारों को सुनाई उम्रकैद की सजा

Sat, 12 Jan 2019 01:38 AM IST
राजेश सिंह न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
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अधिवक्ता धीरेन्द्र सिंह तोमर - फोटो : Amar Ujala
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 लोधा के गांव जतनपुर चिकावटी में पांच साल पहले प्लाट की रंजिश में एक परिवार पर हमलावर होकर एक की हत्या करने और कई लोगों को जख्मी करने के आरोपी हत्यारे करार दे दिए गए। यह फैसला सत्र न्यायाधीश नवीन श्रीवास्तव के न्यायालय से सुनाया गया और सभी आरोपियों को उम्रकैद की सजा व जुर्माने से दंडित किया गया। 
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   शुक्रवार को जब अदालत ने यह फैसला सुनाया तो पुलिस अभिरक्षा में मौजूद आरोपियों व अदालत के बाहर मौजूद उनके परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई। बता दें कि इस प्रकरण में तेरहवां एक आरोपी नाबालिग होने के कारण उसकी पत्रावली अलग लंबित है। इस बहुचर्चित प्रकरण के चलते इस गांव के दो परिवारों में रंजिश मुखर हुई थी और तभी से दोनों परिवार मुकदमे में अपने-अपने स्तर पर पैरवी में जुटे थे।


यह हुआ था घटनाक्रम
अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता डीजीसी धीरेंद्र सिंह तोमर के अनुसार लोधा के गांव जतनपुर चिकावटी निवासी नरेशपाल सिंह की ओर ये यह मुकदमा दर्ज कराया गया कि घटना वाले दिन सुबह करीब सात बजे एक ही परिवार के दर्जन भर नामजद व उनके परिवार की महिलाएं लाठी, डंडों, रायफल आदि असलहों से लैस होकर हमलावर होकर वादी के भाई मुनेशपाल सिंह के प्लाट पर आ गए और वहां जो भी मिला, उसे बेरहमी से पीटा गया। फायरिंग भी की गई और जमकर लाठी-डंडे बरसाए गए। इस दौरान कई लोग घायल हुए, जिसमें किसी के हाथ टूटे, किसी की उंगली कटी। यह घटना देख उनके परिवार के अलावा गांव के लोग घबराकर इधर उधर जान बचाकर भागे। बच्चे चीख पुकार करने लगे। इसके बाद हमलावर वहां से जान माल की धमकियां देते हुए भाग गए। खबर पर पुलिस भी पहुंची और ग्रामीणों की मदद से सभी घायलों को जेएन मेडिकल कॉलेज भिजवाया गया। जहां चार दिन चले उपचार के दौरान वादी के भतीजे यानी प्लाट मालिक मुनेशपाल सिंह के बेटे सोरन सिंह की मौत हो गई। मुकदमे के अनुसार यह हमला प्लाट पर कब्जे के इरादे से ही किया गया था। इस मुकदमे में साक्ष्यों व गवाही के आधार पर सभी 12 आरोपियों को उम्रकैद व 20-20 हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया गया है। 13वें नाबालिग आरोपी की पत्रावली लंबित है।
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घटनाक्रम एक नजर में
04 जुलाई 2013 को बोला था आरोपियों ने यह हमला
08 जुलाई 2013 को घायल सोरन सिंह की हुई थी मौत
07 दिसंबर 2013 व 18 जनवरी 2014 को ट्रायल शुरू 
09 जनवरी 2019 को अदालत में आरोपी दोषी करार दिए
11 जनवरी 2019 को अदालत ने सभी को सजा सुनाई


एक ही परिवार के इन बाप-बेटों सगे भाइयों को सुनाई सजा
इस मुकदमे में  मुनी उर्फ मुनीमपाल सिंह पुत्र सत्यपाल सिंह, मुनी के दो बेटे रवि व रिंकेश, भीकेंद्रपाल सिंह पुत्र राजपाल सिंह, सज्जनपाल पुत्र सूरजपाल सिंह व सज्जनपाल के दो बेटे बंटी व दीपा, दो सगे भाई अतेंद्र सिंह व सतेंद्र पुत्रगण महेंद्र सिंह, राजकुमार  पुत्र रमेशपाल सिंह, राजकुमार का बेटा गौरव व मोटा उर्फ चंद्रप्रकाश पुत्र महेंद्रपाल सिंह को सजा सुनाई गई है।


यह हुए थे घायल
इस घटना में सोरन (मृतक) के अलावा हरेंद्र सिंह, मुनेशपाल सिंह, प्रेमपाल सिंह, पप्पू, करुणानिधि आदि जख्मी हुए थे।


तीन आरोपी पुलिस ने बचाए, मगर कोर्ट में तलब हुए
पुलिस ने विवेचना के दौरान तीन आरोपियों रवि, गौरव व मोटा उर्फ चंद्रप्रकाश के नाम निकालते हुए, बाकी आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर कर दी। चार्जशीट पर ट्रायल शुरू होने के बाद अदालत में दौरान सीआरपीसी की दफा 319 के तहत वादी की याचिका पर इन तीनों को भी मुकदमे में वापस तलब कर लिया गया। 
दोनों ओर से तगड़ी पैरवी, दिए दोषी करार
अदालत में ट्रायल के दौरान दोनों पक्षों की ओर से तगड़ी पैरवी हुई। बचाव पक्ष की ओर से नामजदों के घटना स्थल से पृथक कहीं होने के साक्ष्य पेश किए। मगर उन साक्ष्यों से यह साबित नहीं हो सका कि आरोपी घटनास्थल पर नहीं थे। इसके बाद अदालत ने सभी आरोपियों को बुधवार को दोषी करार दे दिया।
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