न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
एएमयू की जनसंपर्क कमेटी ने उर्दू साहित्य के बड़े लेखक मुश्ताक अहमद यूसुफी के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय साहित्य के लिए एक बड़ी क्षति करार दिया है।
जनसंपर्क कार्यालय के मेंबर इंचार्ज प्रो. शाफे किदवई ने कहा कि यूसुफी के निधन से एक शून्य उत्पन्न हो गया है। जिसका भर पाना मुश्किल है। प्रो. मोहम्मद आसिम सिद्दीकी ने कहा कि यूसुफी एएमयू के पूर्व छात्र थे तथा उन्होंने अविभाजित भारत में आईसीएस अफसर के रूप में अपना कैरियर प्रारंभ किया था। जबकि पाकिस्तान पलायन करने के बाद उन्होंने एक बैंकर के रूप में कार्य किया।
इसी बीच उन्होंने अपनी उम्र के चौथे दशक में व्यंग्य लेखन का कार्य शुरू किया। जिससे उनको बड़ी पहचान मिली। प्रो. मोहम्मद सज्जाद ने कहा कि यूसुफी ने उत्तर आधुनिक काल में भी क्लासिकल साहित्य के चलन को अपनाया तथा कई बड़े उर्दू लेखकों के बीच अपने लिए विशिष्ट स्थान प्राप्त किया। डॉ. अजय बिसारिया ने कहा कि यूसुफी नई नस्ल के लेखकों के लिए एक प्रेरणा स्रोत हैं तथा वह अपनी शैली के लिए सदा याद किए जाएंगे।