न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
नई दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) में प्रस्तावित इस्लामिक आतंकवाद पाठ्यक्रम पर रोक लगाने की मांग शुरू हो गई है। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष मशकूर अहमद उस्मानी एवं फोरम फॉर मुस्लिम स्टडीज एंड एनालिसिस के निदेशक डॉ. जसीम मोहम्मद ने मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर को पत्र लिखकर प्रस्तावित पाठ्यक्रम पर रोक लगाने की मांग की है।
एएमयू के पूर्व मीडिया सलाहकार डॉ. जसीम ने तो यहां तक कहा कि जेएनयू में पाठ्यक्रम शुरू होने से सबका साथ सबका विकास का नारा देने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि खराब होगी।
एएमयू छात्र संघ अध्यक्ष मशकूर अहमद उस्मानी का कहना है कि देश के प्रतिष्ठित केंद्रीय विश्वविद्यालय में प्रस्तावित पाठ्यक्रम के माध्यम से आतंकवाद को धार्मिक रंग दिए जाने से सभी हैरान हैं। आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता।
उनका कहना है कि यूनिवर्सिटी ऐसी जगह होती है, जहां छात्र विभिन्न मुद्दों पर डिबेट कर विचारों का आदान-प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि धर्म का नाम जोड़कर पाठ्यक्रम शुरू करना उचित नहीं है।
मुस्लिम फोरम के निदेशक डॉ. जसीम मोहम्मद का कहना है कि इस्लामिक आतंकवाद नामक पाठ्यक्रम से देश के सौहार्द पूर्ण सामाजिक ताने बाने पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि अभी तक आतंकवाद को परिभाषित नहीं किया जा सका है। यहां तक कि संयुक्त राष्ट्र संघ भी आतंकवाद की किसी एक परिभाषा पर सहमत नहीं है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सबका साथ सबका विकास के अंतर्गत काम कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी छवि है, जिसके परिणाम स्वरूप सऊदी अरब ने भी उन्हें अपने सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से सम्मानित किया है। जेएनयू इस्लामी आतंकवाद पाठ्यक्रम प्रारंभ करता है तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और विपक्षी दलों को मुद्दा मिलेगा।