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जान दे देंगे, गद्दे पर कुश्ती नहीं होने देंगे : पार्षद राजेंद्र

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
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देश-प्रदेश, जिले व ब्लॉक स्तर पर सबसे ज्यादा कुश्ती मिट्टी पर ही होती है, लेकिन अलीगढ़ में किसी भी सरकारी विभाग, स्टेडियम ब्लॉक स्तर पर गद्दे नहीं तो फिर नुमाइश खेल समिति गद्दे पर कुश्ती क्यों कराना चाहती है? जान दे देंगे, गद्दे पर कुश्ती नहीं होने देंगे। ये कहना है नगर निगम के वार्ड नंबर आठ के भाजपा पार्षद राजेंद्र किशोर का।

उन्होंने कहा कि एतिहासिक खेल कुश्ती (मिट्टी) से खिलवाड़ करने नहीं दिया जाएगा। राजेंद्र ने कहा कि नुमाइश बैठक में एडीएम सिटी के समक्ष मजहर उल कमर ने कहा था कि हमारे अखाड़े के सभी बच्चों को एएमयू में सुबह-शाम प्रशिक्षण दिया जाएगा। वह अपनी बात पर कायम नहीं रहे।
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बच्चे शुरुआती दिन से वापस आते रहे। अब चार दिन से बाब-ए-सैयद पर हमारे बच्चों को रोक दिया जाता है। वहां के गार्ड कहते हैं किप्रॉक्टर का ऑर्डर दिखाओगे तभी प्रवेश मिलेगा। उन्होंने कहा कि अखाड़ों के 100 बच्चे कैसे एएमयू में सुबह शाम प्रशिक्षण लेंगे।

एडीएम सिटी या एएमयू प्रशासन लिखित में अनुमति में प्रदान करें, नहीं तो गद्दे पर कुश्ती नहीं होने देंगे। बच्चों की अनुमति मिल गई और उनके साथ अप्रिय घटना घटित होने पर एएमयू प्रशासन व मजहर उल कमर उसके जिम्मेदार होंगे। उधर, जिला कुश्ती वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष कंछी पहलवान व महासचिव डिब्बा पहलवान ने इस संबंध में एडीएम सिटी को पत्र भेजा है।

एएमयू की बदनाम करने की घिनौनी साजिश है। जिले में कुश्ती या किसी भी खेल से यूनिवर्सिटी का कोई लेना नहीं है। यूनिवर्सिटी प्रशासन का जो आदेश मिलेगा, उसका पालन होगा। मीडिया में बयान पीआरओ ऑफिस की तरफ से दिया जाता है, मुझे कुछ नहीं कहना है जिला कुश्ती संघ और जिला प्रशासन इसके बारे में जाने।
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-मजहर उल कमर, एएमयू जिमभनेजियम

यूनिवर्सिटी से गद्दा मांगने से पहले स्पोर्ट्स अथारिटी ऑफ इंडिया से गद्दा जारी हो चुका है। एक-दो दिन में मिल जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में गद्दे पर अभ्यास हो रहे हैं।
सचिव, जिला कुश्ती संघ,
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