न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग की चेयरमैन प्रो. निगार जुबैरी के जेल जाने के मामले में अधिकारिक सूचना नहीं होने का हवाला देकर अधिकारी कार्रवाई से बच रहे हैं। मीडिया में खबर आने के बाद एएमयू रजिस्ट्रार इस मामले में मेरठ के जिलाधिकारी को खत लिख रहे हैं।
एएमयू के सोशल साइंस फैकल्टी के डीन प्रो. अकबर हुसैन ने रजिस्ट्रार को खत लिखकर पूरे प्रकरण से अवगत करा दिया था। उन्होंने कहा था कि जांच कर इसकी जानकारी कर ली जाए कि प्रो. निगार जुबैरी जेल गई हैं या नहीं। संपत्ति विवाद से संबंधित मामले में प्रो. निगार जुबैरी मेरठ जेल में हैं। विभाग के जानकारों का कहना है कि नियमानुसार जेल जाने की स्थिति में शिक्षक को 48 घंटे के बाद निलंबित कर दिया जाता है।
प्रो. निगार के बारे में कहा जा रहा है कि वह 6 मई से मेरठ जेल में हैं और उन्होंने डीन को इससे संबंधित कोई सूचना भी नहीं दी है। सोशल साइंस फैकल्टी के डीन प्रो. अकबर हुसैन का कहना है कि उन्होंने रजिस्ट्रार को खत लिखकर पूरे प्रकरण से अवगत करा दिया है। अब तक वहां से कोई सूचना नहीं दी गई है। एएमयू रजिस्ट्रार अब्दुल हमीद आईपीएस ने बताया कि प्रो. निगार जुबैरी के जेल जाने से संबंधित अधिकारिक सूचना नहीं है। इसलिए इस संबंध में मेरठ के जिलाधिकारी को खत लिखा जा रहा है ताकि इससे संबंधित तमाम जानकारी हासिल हो सकें।
प्रो. निगार के पत्र पर भी सवाल
अलीगढ़। प्रो. निगार जुबैरी के नाम का एक खत अधिकारियों के पास पहुंचा है। 6 मई की तिथि के इस पत्र को 13 मई को एएमयू में रिसीव कराया गया है। पत्र उनकी बेटी लेकर आई थी। पत्र में कहा गया है कि वह व्यक्तिगत कार्यों से बाहर हैं। विभाग के कुछ लोग पत्र पर सवाल उठा रहे हैं। ऐसे लोगों का कहना है कि प्रो. निगार के हस्ताक्षर का मिलान होना चाहिए और यह भी पता चलना चाहिए कि पत्र उन्होंने स्वयं लिखा है या किसी अन्य से लिखवाया गया है।