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बस अड्डे से डग्गामारी बंद कराने पर थे निशाने पर

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न्यूज डेस्क, यतीश शर्मा, अलीगढ़।
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वर्कशॉप से स्थानांतरित होकर गांधी पार्क बस अड्डे पर तैनात हुए लक्ष्मीकांत पंडित ने गांधी पार्क बस अड्डे से होने वाली डग्गामारी को एकदम बंद करा दिया था। यही कारण था कि डग्गामारी करने वालों गैंग के निशाने पर वह पूरी तरह थे। रविवार को मौका देख बस के परिचालक ने उन्हें मौत के घाट उतार दिया।

रोडवेज में परिचालक के रूप में तैनात लक्ष्मीकांत पंडित पिछले करीब एक साल से गांधी पार्क बस अड्डे पर सिफ्ट इंचार्ज की ड्यूटी कर रहे थे। उन्होंने अपनी तैनाती के बाद से ही मध्य प्रदेश रोडवेज बस को गांधी पार्क बस अड्डे के अंदर से सवारी भरने पर रोक लगा दी।
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सूत्रों का कहना है कि बस के चालक-परिचालक ने गांधी पार्क बस अड्डे के सामने कुछ देर गाड़ी को खड़े कराने की एवज में पांच सौ रूपये रोजाना देने का ऑफर भी दिया, लेकिन उन्होंने ऑफर को ठुकरा दिया।

इसके बाद और कई प्रयास हुए, लेकिन मध्य प्रदेश बस के चालक-परिचालक को हमेशा मुंह की खानी पड़ी। इसके अलावा अन्य डग्गामारी करने वाले बस चालक-परिचालक एवं बसों को संचालित कराने वालों के निशाने पर वह चढ़े हुए थे।

रविवार को वर्कशॉप जाने के दौरान उन्होंने जब मध्य प्रदेश की बस को सेटेलाइट बस के अंदर से सवारी भरते देखा तो उसकी वीडियो बनाने लगे और इसकी सूचना एआरएम बुद्ध विहार आलोक दास को दी। सूत्र बताते हैं कि एआरएम के कहने पर ही वह बस को रोकने के खिड़की पर चढ़े।

इसी दौरान बस के परिचालक ने उन्हें धक्का दे दिया और बस के पहिए के नीचे आने से उनकी मौत हो गई। उनकी मौत की खबर जब रोडवेज के कर्मचारियों को हुई तो उनमें आक्रोश फैल गया। रविवार होने के बावजूद भी बड़ी संख्या में रोडवेज के अधिकारी एवं कर्मचारी मौके पर और उसके बाद पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे।

सेटेलाइट से होने वाली डग्गामारी के खिलाफ कई बार उठा चुके थे आवाज
मध्य प्रदेश की बस द्वारा सेटेलाइट बस अड्डे से सवारी भरने को लेकर पूर्व में भी कई बार सवाल उठ चुके हैं, लेकिन अधिकारियों की मिलीभगत से कुछ दिन बंद रहने के बाद बस का संचालन पुन: शुरु हो गया।

रोडवेज कर्मचारी मजदूर संघ के क्षेत्रीय कोषाध्यक्ष लक्ष्मीकांत पंडित ने इसके खिलाफ कई बार आवाज भी उठाई। बुद्ध विहार एआरएम आलोक दास ने तो गांधी पार्क बस अड्डे में मध्य प्रदेश की बस पर रोक लगा दी, लेकिन सेटेलाइट बस अड्डे से बस लगातार संचालित रही।

इसको लेकर अमर उजाला ने भी खबर प्रकाशित की, लेकिन अधिकारियों ने इसके ऊपर कोई ध्यान नहीं दिया। यदि समय रहते अधिकारी डग्गामार बस के संचालन पर रोक लगाते तो आज रोडवेज अपने ईमानदारी कर्मचारी से हाथ नहीं धो बैठता।

सेटेलाइट से डग्गामारी नहीं रुकी तो और जाएंगी जान
सेटेलाइट बस अड्डे से होने वाली डग्गामारी अभी और रोडवेज कर्मचारियों की जान ले सकती है। यहां दिल्ली के लिए संचालित होने वाली डग्गामारी बस के चालक परिचालकों के भी कुछ इसी तरह के हौंसले हैं। रोडवेज एवं आरटीओ कभी कभार एकाध बस के खिलाफ कार्यवाही कर इतिश्री कर लेते हैं। बावजूद यहां से आनंद विहार दिल्ली के लिए अनवरत बसों का संचालन हो रहा है।

यात्रियों को भ्रमित करने के लिए बसों का संचालन करने वाले गैंग ने बस को रोडवेज के रंग में रंगा रखा है और उसके ऊपर उत्तर प्रदेश परिवार, उत्तर प्रदेश एक्सप्रेस समेत अन्य मिलते जुलते नाम लिख रखे हैं। ताकि सवारी भ्रमित होकर उनमें सवार हो जाए और ऐसा हो भी रहा है।

अमर उजाला ने भी 14 अप्रैल को फर्राटा भर रही उत्तर प्रदेश परिवार लिखी बसें शीर्षक से खबर प्रकाशित कर अधिकारियों का ध्यान इस ओर आकर्षित भी कराया था, अधिकारियों ने करीब आधा दर्जन गाड़ियों के खिलाफ कार्यवाही भी की, लेकिन कार्यवाही इतनी हल्की थी कि दूसरे ही दिन से पुन: बसों का संचालन शुरू हो गया।
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14 दिन पहले ही मृतक के पुत्र के सिर पर बंधा था सेहरा
अलीगढ़। रोडवेज कर्मचारी मजदूर संघ के क्षेत्रीय कोषाध्यक्ष लक्ष्मीकांत पंडित के पुत्र अभिषेक पंडित के सिर पर 14 दिन पहले ही सेहरा बंधा था। पूरा परिवार खुशी के मारे फूला नहीं समा रहा था। अभी तक घर में खुशी का माहौल था कि रविवार को शादी के लक्ष्मीकांत पंडित की मौत ने पूरे परिवार को हिलाकर रख दिया। मृतक के पुत्र विवाह 28 अप्रैल को सासनी के पास स्थित नगला गढ़ी हुआ था।
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