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सबूत पर ही प्रत्याशी को चुनौती दे सकेंगे विरोधी-Cordination

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न्यूज डेस्क, आशीष श्रीवास्तव, अलीगढ़।
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चुनावों में भाग्य अजमाने वाले प्रत्याशी को वोटरों पर डोरे डालने के साथ अपने विरोधियों का भी सामना करना पड़ता है। विरोधियों द्वारा बगैर सबूत लगाए गए तमाम आरोपों के चलते कभी कभी प्रत्याशी की नामांकन के दौरान ही दावेदारी खतरे में पड़ जाती है। लेकिन इस बार के लोकसभा चुनावों में ऐसा नहीं हो सकेगा।

आरोप लगाने वाले विरोधी को न केवल पुख्ता सबूतों के आधार पर प्रत्याशी पर आरोप लगाने होंगे, बल्कि उसे संबंधित विभाग में एफआईआर अथवा वाद दायर कराकर ही अपने आरोपों को सिद्ध करना होगा। रिटर्निंग अफसर इस मामले में कोई कार्रवाई करने के लिए अधिकृत नहीं होंगे। यह बात दीगर है कि संबंधित न्यायालय अथवा किसी अन्य अधिकृत स्रोत के आदेश आने की स्थिति में प्रत्याशी की दावेदारी निरस्त भी हो सकती है।
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उप जिला निर्वाचन अधिकारी एवं एडीएम प्रशासन कृष्ण लाल तिवारी ने बताया कि इस बार किसी भी प्रत्याशी द्वारा दिए गए शपथपत्र की जानकारी अथवा किसी अन्य कारण से रिटर्निंग अफसर प्रत्याशी की दावेदारी निरस्त नहीं करेंगे। उसके लिए प्रत्याशी के विरोधियों को सक्षम न्यायालय अथवा अन्य सक्षम स्रोतों की शरण में जाकर अपने आरोप सिद्ध करने होंगे।
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उन्होंने बताया कि फार्म 26, जिसमें संपत्ति, अपराध समेत अन्य विवरण भरने होते हैं, उसमें प्रत्याशी को विशेषकर अपनी आय के मामले में पांच साल के रिटर्न दाखिल करने होंगे। यह भी बताना होगा कि उसकी आय पिछले पांच सालों में किन स्रोतों से बढ़ी है। कई अन्य बदलाव भी हुए हैं।
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