न्यूज डेस्क, अमर उजाला,अलीगढ़।
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के जेएन मेडिकल कॉलेज के मानसिक रोग विभाग में विश्व शिजोफ्रिनिया दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
विभागाध्यक्ष प्रो. प्रो. एसए आजमी ने कहा है कि शिजोफ्रिनिया एक मानसिक रोग है और इसकी व्यापकता एक प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि यह रोग आमतौर पर 15 से 25 वर्ष आयु वर्ग के लोगों में होता है। इसमें रोगी की सोच खराब होना शुरू हो जाती है और शक करने की प्रवृति बढ़ जाती है।
डॉ. आजमी ने कहा कि रोगी को कोई स्रोत न होते हुए भी आवाजें सुनाई देती हैं और उसका व्यवहार भी असामान्य हो जाता है। इस रोग के होने का कारण मस्तिष्क में जैव रसायन तत्वों का असंतुलन है और इसका उपचार भी संभव है। उन्होंने कहा कि शिजोफ्रिनिया एक मानसिक रोग है और यह कोई जादू टोना नहीं है।
इसलिए रोग के लक्षण पाए जाने पर झाड़फूंक, खराब हवा, ऊपरी चक्कर आदि में न फंसकर तत्काल चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि रोगी के साथ सामान्य बर्ताव एवं उसका सम्मान करना चाहिए। कार्यक्रम के दौरान विभाग के शिक्षक एवं रेजीडेंट चिकित्सक मौजूद थे।