एक नक्शा पास कराने में भाजपाई को छूट गए पसीने
ब्यूरो,अमर उजाला
वर्ष 1990 में भाजपा में शामिल हुए। हर कार्यक्रम और हरेक चुनाव में सक्रिय रहने वाले जितेंद्र प्रताप सिंह राणा अपनी ही सरकार में बेगाने हो गए हैं। आलम ये है कि उनके अपने ही पेट्रोल पंप के एक अदद आफिस बनवाने में उनको नाकाें चने चबाने पड़ गए हैं। 27 साल तक भाजपा से जुड़े रहने के बाद अब वह समझ नहीं पा रहे हैं कि क्या करें और कहां जाएं..?
बात इतनी ही नहीं है। आवास एवं शहरी नियोजन तथा व्यवसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास मिशन के राज्यमंत्री सुरेश पासी की सिफारिश भी किसी काम नहीं आई। 10 अगस्त को राज्यमंत्री ने इस प्रकरण में एडीए वीसी निशा गोयल से अविलंब कार्रवाई करने को कहा था, लेकिन एक महीने से अधिक समय बीतने के बाद भी कुछ नहीं हुआ।
अभी हाल ही में उन्होंने सीएम के जन शिकायत पोर्टल पर अपनी शिकायत भेजी है और मंडलायुक्त सुभाष चंद्र शर्मा के समक्ष भी अपना दर्द बयां किया है कि एक नक्शा एडीए से तब पास नहीं हो रहा है जब उनकी फीस सहित दूसरी प्रक्रिया पूरी है।
राणा ने कहा कि उन्हें ये नहीं पता था कि उनकी ही सरकार में एक काम इतना मुश्किल हो जाएगा। दस महीने से वह एडीए के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन नक्शा पास नहीं हुआ। वो भी तक विभाग के अफसर 300 वर्गगज तक नक्शा 24 घंटे में पास करने का दावा कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि अब उनको सीएम के पोर्टल से आने वाले जवाब का इंतजार है। इसके बाद वह आगे की कार्यवाही कानूनी राय लेने के बाद करेंगे। अगर नक्शा पास नहीं करना है तो कम से कम उनको कमियां ही बता दी जाती, लेकिन ये भी नहीं हुआ है।