उसकी ताजतरीन पुस्तक आर्का रहस्य-रोमांच और पराशक्तियों पर आधारित है। यह किताब कुछ किशोर दोस्तों के अनुभव पर आधारित है। आर्का उसके दोस्तों की सेना का नाम है। यह लोग जंगल में भटक जाते हैं। इसके बाद अदृश्य पराशक्तियां उन्हें परेशान करने लगती हैं। वह जंगल में ही एक पुराने महल में शरण लेते हैं। उनके साथ कई रहस्यपूर्ण घटनाएं घटती हैं। यहां तक कि एक साथी की अजीबोगरीब तरीके से हत्या हो जाती है। इसी महल की लाइब्रेरी में एक पुस्तक मिलती है। यह इस संकट से निपटने में सहायक साबित होती है। दरअसल महल में सक्रिय रहस्यमयी शक्ति धरती से परे किसी और लोक की सेना का एक सदस्य होता है। इसका लक्ष्य धरती की सभ्यता को खत्म करके इस पर कब्जा जमाना रहता है। आर्का सेना जब इसका बहादुरी से मुकाबला करती है तो इसकी खबर दुनिया की दूसरी ताकतों को होती है। इसके बाद वह आर्का की मदद करते हैं। और सफल होते हैं।
प्रशांत बताता है कि दादा से संबंधित १६५ पेज की किताब ऑनलाइन भी उपलब्ध है। आर्का छपकर आने वाली है। यह भी ऑनलाइन उपलब्ध होगी। लेखन प्रक्रिया के बारे में प्रशांत कहता है कि अंग्रेजी में लिखना उसे सहज लगता है। वह लिखकर अपने अंग्रेजी के टीचर को दिखाता है। अगर किसी वाक्य में व्याकरण संबंधी त्रुटि होती है तो वह दुरुस्त कर देते हैं। वह भाषा ठीक करने के लिए इंटरनेट की भी मदद लेता है। उसका मकसद विक्रम सेठ और चेतन भगत की तरह बढ़ा लेखक बनना है। वह कहता है फिलहाल उनके आदर्श अलीगढ़ में तैनात रहे संभागीय परिवहन अधिकारी डॉ. विक्रम सिंह हैं।
बेटे के लेखक पर माली पिता हैरत में
आरटीओ कार्यालय में माली के पद पर तैनात हर्षवर्धन गौतम ने बताया कि वह बेटे प्रशांत के लेखक होने पर हैरत में हैं। इतनी कम उम्र में उसने दो किताबें लिख दी, यह प्रशंसनीय है, क्योंकि घर-परिवार में कोई लेखक नहीं है। वह स्वयं 12वीं तक पढ़े हैं। शाहपुर कुतुब निवासी हर्षवर्धन और हेमलता ने कहा कि उन्हें बेटे प्रशांत पर गर्व है।