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माली की बगिया में खिला प्रतिभा का फूल: दसवीं का छात्र, ऐसे बना दो अंग्रेजी किताबों का लेखक

Fri, 22 Sep 2023 04:59 AM IST
चमन शर्मा इकराम वारिस, अमर उजाला, अलीगढ़

सार

प्रशांत के पिता आरटीओ दफ्तर में माली का काम करते हैं। घर में कोई ऐसा बौद्धिक माहौल भी नहीं है। संभवतः जीडी पब्लिक स्कूल खैर रोड के प्रशांत में लेखन की नैसर्गिक प्रतिभा कूट-कूटकर भरी है। पहले तो उसने अपने दादा श्यौदान गौतम की जिंदगी पर आधारित एक उपन्यास लिखा।
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लेखक प्रशांत गौतम और उनकी दो किताबें - फोटो : स्वयं
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विस्तार
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कहावत है कि पूत के पांव पालने में ही देखे जाते हैं। अलीगढ़ के प्रशांत की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। दसवीं कक्षा में पढ़ने वाले इस प्रतिभाशाली किशोर ने रहस्य-रोमांच से भरा उपन्यास लिख डाला है। प्रशांत इससे पहले खेती-किसानी करने वाले अपने दादा की संघर्षगाथा को उपन्यास के रूप में ढाल चुका है। उसके दोनों उपन्यासों की भाषा अंग्रेजी है। उसके शिक्षक भी उसकी प्रतिभा की तारीफ करते नहीं अघाते।

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प्रशांत के पिता आरटीओ दफ्तर में माली का काम करते हैं। घर में कोई ऐसा बौद्धिक माहौल भी नहीं है। संभवतः जीडी पब्लिक स्कूल खैर रोड के प्रशांत में लेखन की नैसर्गिक प्रतिभा कूट-कूटकर भरी है। पहले तो उसने अपने दादा श्यौदान गौतम की जिंदगी पर आधारित एक उपन्यास लिखा। यह उपन्यास एक आम भारतीय किसान की संघर्षगाथा को समेटे हुए है। प्रशांत कहता है कि वह अपने दादा का काफी दुलारा था। 

उनके साथ कई-कई घंटे गुजारता। उनसे बातें करता। उसके दादा जिंदगी के पुराने पन्ने पलटते। अपने जमाने की बातें करते। आज के दौर के बदलावों की बात करते। वह प्रगतिवादी थे। उनका बाल विवाह हुआ था, लेकिन वह इसके विरोधी थे। बाल विवाह पर लगी रोक को उचित मानते थे। लेकिन मोबाइल-टीवी के बच्चों और किशोरों पर पड़ रहे दुष्प्रभावों से चिंतित भी रहते थे। उनकी जिंदगी ने प्रशांत को काफी प्रेरित किया।

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उसकी ताजतरीन पुस्तक आर्का रहस्य-रोमांच और पराशक्तियों पर आधारित है। यह किताब कुछ किशोर दोस्तों के अनुभव पर आधारित है। आर्का उसके दोस्तों की सेना का नाम है। यह लोग जंगल में भटक जाते हैं। इसके बाद अदृश्य पराशक्तियां उन्हें परेशान करने लगती हैं। वह जंगल में ही एक पुराने महल में शरण लेते हैं। उनके साथ कई रहस्यपूर्ण घटनाएं घटती हैं। यहां तक कि एक साथी की अजीबोगरीब तरीके से हत्या हो जाती है। इसी महल की लाइब्रेरी में एक पुस्तक मिलती है। यह इस संकट से निपटने में सहायक साबित होती है। दरअसल महल में सक्रिय रहस्यमयी शक्ति धरती से परे किसी और लोक की सेना का एक सदस्य होता है। इसका लक्ष्य धरती की सभ्यता को खत्म करके इस पर कब्जा जमाना रहता है। आर्का सेना जब इसका बहादुरी से मुकाबला करती है तो इसकी खबर दुनिया की दूसरी ताकतों को होती है। इसके बाद वह आर्का की मदद करते हैं। और सफल होते हैं। 

प्रशांत बताता है कि दादा से संबंधित १६५ पेज की किताब ऑनलाइन भी उपलब्ध है। आर्का छपकर आने वाली है। यह भी ऑनलाइन उपलब्ध होगी। लेखन प्रक्रिया के बारे में प्रशांत कहता है कि अंग्रेजी में लिखना उसे सहज लगता है। वह लिखकर अपने अंग्रेजी के टीचर को दिखाता है। अगर किसी वाक्य में व्याकरण संबंधी त्रुटि होती है तो वह दुरुस्त कर देते हैं। वह भाषा ठीक करने के लिए इंटरनेट की भी मदद लेता है। उसका मकसद विक्रम सेठ और चेतन भगत की तरह बढ़ा लेखक बनना है। वह कहता है फिलहाल उनके आदर्श अलीगढ़ में तैनात रहे संभागीय परिवहन अधिकारी डॉ. विक्रम सिंह हैं।

बेटे के लेखक पर माली पिता हैरत में
आरटीओ कार्यालय में माली के पद पर तैनात हर्षवर्धन गौतम ने बताया कि वह बेटे प्रशांत के लेखक होने पर हैरत में हैं। इतनी कम उम्र में उसने दो किताबें लिख दी, यह प्रशंसनीय है, क्योंकि घर-परिवार में कोई लेखक नहीं है। वह स्वयं 12वीं तक पढ़े हैं। शाहपुर कुतुब निवासी हर्षवर्धन और हेमलता ने कहा कि उन्हें बेटे प्रशांत पर गर्व है।
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