न्यूज डेस्क, अमर उजाल, अलीगढ़।
जामिया उर्दू में साहित्य, समाज और व्यक्तित्व विषय पर सेमिनार हुआ। साथ ही शोध पत्र पढ़ने वाले व प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।
ओएसडी फरहत अली खान ने कहा कि जामिया उर्दू की कोशिश है कि उर्दू भाषा को रोजगार से जोड़ा जाए, ताकि समाज में सकारात्मक बदलाव हो। जामिया उर्दू के निदेशक डॉ. जसीम मोहम्मद ने कहा कि जामिया उर्दू केवल शिक्षा का प्रचार प्रसार ही नहीं कर रहा है, युवाओं व छात्रों के संपूर्ण विकास के लिए भी है।
एएमयू के पूर्व डीन प्रो. शेख मस्तान ने कहा कि जामिया उर्दू लगातार उर्दू भाषा व साहित्य की सेवा कर रहा है। एएमयू के उर्दू विभाग के अध्यक्ष प्रो. तारिक अहमद छतारी ने कहा कि उर्दू केवल एक नहीं, संस्कृति है। हैदराबाद की आरजे हिरा आफताब ने कहा कि साहित्य से ही महिलाओं की सामाजिक स्थिति में बदलाव हुआ है। एएमयू उर्दू एकेडमी के निदेशक डॉ. जुबैर शादाब, जामिया उर्दू के रजिस्ट्रार शामून रजा नकवी, मुसाईद किदवई, डॉ. फुरकान संभली, डॉ. आफताब आलम, कंट्रोलर रिजवान अली खान ने विचार व्यक्त किए।