न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
अलीगढ़ की कई सामाजिक, सांस्कृतिक संस्थाओं ने मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी की भर्त्सना की है। जन संस्कृति मंच, जनवादी लेखक संघ व प्रगतिशील लेखक संघ की अलीगढ़ इकाई ने सामूहिक बयान में इन सामाजिक कार्यकर्ताओं पर झूठी और मनगढ़ंत आरोप लगाकर गिरफ्तार किए जाने की निंदा की है।
बयान में कहा गया कि मानव अधिकार कार्यकर्ता, जुझारू पत्रकार व कई प्रसिद्ध पुस्तकों के लेखक गौतम नवलखा, आदिवासियों व हाशिये के लोगों के लिए समर्पित कानून विद् सुधा भारद्वाज, राजनीतिक सामाजिक कार्यकर्ता वरनन गोंसाल्विस व सुप्रसिद्ध अधिवक्ता अरुण फरेरा की गिरफ्तारी एक लोकतांत्रिक देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण और लज्जाजनक है।
साझा बयान में यह भी कहा गया है कि अत्यंत प्रसिद्ध और लोकप्रिय बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, विद्वानों की गिरफ्तारी हाशिये के लोगों के हक की गिरफ्तारी है। सरकार चाहती है कि गरीबों, आदिवासियों, दलितों और अल्पसंख्यकों की ओर से कोई आवाज न उठाएं। इन गिरफ्तारियों के माध्यम से सत्ता यह संदेश देना चाहती है कि अगर इन मजलूमों की ओर से कोई आवाज, प्रतिवाद या संघर्ष करेगा तो उसे इसी तरह सजा मिलेगी। साझे बयान में बाइज्जत बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की अविलंब रिहाई की मांग की गई।
साथ ही पूर्व में गिरफ्तार दलित कार्यकर्ता सुधीर धावले, प्रसिद्ध अधिवक्ता सुरेंद्र गाडगिल, सामाजिक कार्यकर्ता महेश राउत व प्रोफेसर सोमा सेन की बाइज्जत रिहाई की मांग की गई। सामूहिक बयान जारी करने वालों में जनवादी लेखक संघ की अध्यक्ष नमिता सिंह, सचिव प्रो. शंभू नाथ तिवारी, प्रो. प्रदीप सक्सेना, डॉ. प्रेम कुमार, प्रो. अजय बिसारिया, प्रगतिशील लेखक संघ की ओर से प्रो. आसिम सिद्दीकी, प्रो. वेदप्रकाश व जन संस्कृति मंच की ओर से प्रो. कमलानंद झा, प्रो. रमेश कुमार आदि प्रमुख हैं।