न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
देव भाषा संस्कृत में अब मशहूर शायर गालिब की शायरी का आनंद लीजिए। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. परमानंद शास्त्री ने गालिब के काव्य का संस्कृत में अनुवाद किया है।
प्रो. शास्त्री के निधन के बाद उनके शागिर्द प्रो. एसपी शर्मा के प्रयास से पुस्तक ‘आनन्दगालिबीयम्’ प्रकाशित होकर एएमयू के विद्वानों के हाथ में पहुंच गई है। उर्दू-फारसी से संस्कृत में अनूदित पुस्तक की व्याख्या हिंदी में भी की गई है। इस पुस्तक की एक खासियत यह भी है कि उर्दू-फारसी का हिंदी लिप्यांतर भी किया गया है।
प्रो. परमानंद शास्त्री एएमयू संस्कृत विभाग से पीएचडी की डिग्री हासिल करने वाले पहले छात्र थे। बाद में यहां शिक्षक एवं संस्कृत विभाग के अध्यक्ष भी बने। उन्होंने एएमयू तराना ‘ये मेरा चमन...’ का भी संस्कृत में अनुवाद किया था, जिसे विभाग के छात्र आज भी कार्यक्रम में गुनगुनाते हैं। उन्होंने अपने जीवन काल में ही उर्दू के महान शायर मिर्जा असद-उल्लाह बेग खां उर्फ गालिब के उर्दू-फारसी काव्य का संस्कृत में अनुवाद किया। इसी बीच उनका निधन हो गया।
--
हंसा प्रकाशन द्वारा प्रकाशित प्रो. परमानंद शास्त्री द्वारा अनुदित पुस्तक ‘आनन्दगालिबीयम्’ मेरे पास पहुंच गई है। यह अपने तरह का अनोखा एवं शानदार कार्य है। इसे पुस्तक का रूप दिलाने में प्रो. एसपी सिंह का विशेष योगदान है।
- प्रो. अब्दुल अलीम, विभागाध्यक्ष, एएमयू हिंदी विभाग
प्रो. परमानंद शास्त्री की संस्कृत, हिंदी, उर्दू, फारसी आदि भाषाओं पर पकड़ थी। प्रारंभिक शिक्षा लाहौर में हुई थी। पीएचडी हासिल करने वाले वह विभाग के पहले छात्र थे। इमरजेंसी के समय उन्होंने जंग विजय महाकाव्य की रचना की, जिसे उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पुरस्कृत किया गया। करीब 22 पुस्तकें लिखी हैं।
- प्रो. खालिद बिन यूसुफ, विभागाध्यक्ष, एएमयू संस्कृत विभाग