न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
डॉ. बीआर अंबेडकर विवि के कुलपति प्रो. एके दीक्षित के खिलाफ छात्रों ने जमकर नारेबाजी की। इस दौरान छात्रों ने कार्यक्रम स्थल का दरवाजा तोड़ने का भी प्रयास किया। कुलपति टीकराम कन्या महाविद्यालय में ‘मैनेजमेंट ऑफ एकेडमिक स्ट्रेस’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत आए थे।
मंगलवार को कुलपति से मिलने और उनके समक्ष अपनी बात रखने के लिए टीकाराम महाविद्यालय के सभागार के सामने छात्रों ने धरना दिया। इस दौरान छात्रों ने खूब नारेबाजी की। छात्रों का गुस्सा बढ़ता जा रहा था।
छात्रों से धरना खत्म करने को शिक्षिकाओं ने खूब कहा, लेकिन वह नहीं माने। इसके बाद पांच छात्रों के कुलपति के समक्ष बात रखने के नाम मांगे गए। इस पर भी वह तैयार नहीं हुए। आखिरकार, कुलपति ने अमित गोस्वामी, रंजीत चौधरी, सौरभ चौधरी, अर्जुन सिंह भोलू सहित अन्य छात्रों की बात सुनीं। कुलपति से छात्रों ने जवाब मांगा।
उन्होंने कहा कि जो मुद्दे उठाए गए हैं, वह विधि के छात्रों ने उठाया, उन्हें कानून-कायदा का ज्ञान होना चाहिए। कॉलेज को घटाने और बढ़ाने का अधिकार सरकार के पास है। छात्रों की मांगों को ठुकराते हुए कुलपति सभागार रवाना हो गए। सुरक्षा कर्मियों ने सभागार का दरवाजा बंद कर दिया। छात्रों ने उनके खिलाफ जमकर नारेबाजी की। छात्रों ने दरवाजा तोड़ने का प्रयास किया। हालांकि, इस दौरान पुलिस फोर्स तैनात रही।
फरवरी-मार्च में शुरू हो सकते हैं शोध कार्य : प्रो. दीक्षित
कुलपति प्रो. एके दीक्षित ने कहा कि यूनिवर्सिटी में वर्ष 2009 से शोध कार्य बंद है। उन्होंने 23 दिसंबर 2017 को कुलाधिपति (राज्यपाल) को इस बारे में पत्र भेज चुके हैं। उन्हेें उम्मीद है कि इस बार सफलता मिलेगी। जल्द ही अधिसूचना जारी कर दी जाएगी। सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो फरवरी-मार्च में शोध कार्य शुरू हो सकते हैं।
विद्यार्थियों के भविष्य को दांव पर नहीं लगा सकते
कुलपति ने कहा कि कुछ विद्यार्थियों के चलते सात लाख विद्यार्थियों के भविष्य को दांव पर नहीं लगा सकते। इस मामले में वह समझौता नहीं करेंगे। रही बात उत्तर पुस्तिकाओं के जांचने की, तो उसे सेल्फ फाइनेंस के शिक्षकों ने मूल्यांकन नहीं किया है। पुनर्मूल्यांकन को उत्तर प्रदेश सरकार खत्म कर चुकी है। कानपुर यूनिवर्सिटी की तर्ज पर वह काम कर रहे हैं। व्यवस्था बदलने में वक्त तो लगेगा ही। लॉ में 75 फीसदी सीटें खाली रह गई हैं। प्रवेश परीक्षा हुई थी।
अलीगढ़ में विरोध की परंपरा
कुलपति प्रो. एके दीक्षित ने कहा कि हर जगह की एक परंपरा होती है। किसी कॉलेज में जब कोई कुलपति जाता है, तो वहां के विद्यार्थी फूलों के गुलदस्ते से स्वागत करते हैं, लेकिन अलीगढ़ में विरोध, धरना, प्रदर्शन से स्वागत होता है। ऐसा आज (मंगलवार) भी हुआ।
आंतरिक गुणवत्ता होती है विकास की आत्मा : प्रो. दीक्षित
डॉ. बीआर अंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा के कुलपति प्रोफेसर एके दीक्षित का कहना है कि आंतरिक गुणवत्ता विकास की आत्मा होती है। गुणवत्ता से समझौता नहीं होना चाहिए।
मंगलवार को उन्होंने टीकाराम कन्या महाविद्यालय में ‘मैनेजमेंट एकेडमिक ऑफ स्ट्रेस’ विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला में कहा कि बीएड के दो सत्रों को एक साथ कराकर सत्र को पटरी पर लाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि व्यक्ति का मनोविज्ञान ठीक हो जाए सब कुछ ठीक हो जाएगा।
प्रयोगात्मक परीक्षा व मूल्यांकन का आवंटन कंप्यूटर से हो रहा है। महात्मा गांधी हिंदी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय वर्धा के कुलपति प्रो. गिरीश्वर मिश्रा ने कहा कि व्यक्तित्व का विकास करना बहुत जरूरी है। इंसान के पास जरूरतों का पुलिंदा होता है। उन्होंने कहा कि उपनिषद में श्रेय व प्रेय होते हैं।
श्रेय में पसंद भी है और जरूरत भी। प्रेय में पसंद है, लेकिन जरूरी नहीं है। उन्होंने विद्यार्थियों से ‘द क्रस ऑफ सेल्फ’ किताब पढ़ने को कहा है। प्राचार्या डॉ. चंद्रकांता अग्रवाल ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस मौके पर इग्नू के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. एमआर फैसल, एएमयू के प्रोफेसर अकबर, डॉ. मंजू शर्मा, डॉ. स्मृति कौशिक, डॉ. लकी गुप्ता, डॉ. नमिता सिंह, डॉ. अनुराधा आदि मौजूद रहीं।