इकराम वारिस, अमर उजाला, अलीगढ़।
जहां चाह है, वहीं राह भी है। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है 89 वर्षीय अल्लारक्खी ने। उम्र की परवाह किए बगैर मकान की तीसरी मंजिल की छत पर उन्होंने फल और फल की दुनिया बना रखी है।
वह कहती हैं उनकी फुलवारी में जान बसती है। उनसे प्रभावित होकर कई लोग अपने घर की छत को फुलवारी बना चुके हैं। इस उम्र में अल्लारक्खी मिसाल बन गई हैं।
जम्मू कश्मीर की वादियों से प्रभावित
महानगर के दोदपुर की पत्थर वाली गली नई आबादी में फौज से सेवानिवृत्त कैप्टन आसीन खान का घर है। जब आसीन खान जम्मू कश्मीर में तैनात थे, तब उनकी मां अल्लारक्खी गई थीं। वह कश्मीर की प्रकृति पर फिदा हो गई थीं। सो, उन्होंने छत पर बेकार चीजों में पौधे रोपे दिए। वक्त के साथ अब छत फुलवारी बन गई है।
गमले में संतरे और सब्जियां
गमले में संतरे लगे हैं। हालांकि, अभी छोटे हैं। इसके अलावा एलोवेरा, पत्थरचट्टा, तुलसी, डहेलिया के फूल लगे हैं। सीजन के हिसाब से सब्जियां भी उगाती हैं। गेंदे का फूल भी बगिया को खूबसूरत बना रहा है।
बगिया की देखभाल में उनका वक्त कट जाता है। सीढ़ियां चढ़ने में भी उन्हें परेशानी नहीं हो रही है। वह रोजाना योगा भी करती हैं।
-अल्लारक्खी
खास बात ये है कि अम्मा बगिया में रासायनिक खाद का इस्तेमाल नहीं करती हैं। दिन में चार बार सीढ़ियों उतरती और चढ़ती हैं।
- कैप्टन आसीन खान