फूल चौक से निकला ताजिए का जुलूस
ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
मुहर्रम की चार तारीख को फूल चौक स्थित इमामबाड़ा रियासत अली से ताजिए का जुलूस निकला। जुलूस इमामबाड़ा से उठकर छतारी वाली मस्जिद, गली डोली वाली, आतिश बाजान, पहला फर्श, दूसरा फर्श से मुड़कर मस्जिद शियान पर पहुंचा। ताजिए रखकर मातम, नोहा पढ़े गए।
ताजिए का जुलूस राजा जी के चबूतरे पर रखा गया। फिर यहां से उठकर चौक बुंदू खां, पुल कंजड़ान, जामा मस्जिद, चंदन शहीद रोड, घास मंडी, काला महल से मोहल्ला रंगरेजान, दरबार गेट, बनी पर जुलूस समाप्त हुआ। ताजिए पर महिलाएं और पुरुषों ने माला चढ़ाकर मन्नत मांगी।
नोहाख्वानी करने वालों में अनवार हैदर, बुद्धन, गुलरेज, बबलू आदि थे। करबला के मुतवल्ली मुख्तार जैदी, इमामबाड़ा रियासत अली के सैयद परवेज अख्तर, बॉबी ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया। जुलूस में सुरक्षा व्यवस्था के चाक-चौबंद इंतजाम थे। जुलूस में सीओ सिटी, सिटी मजिस्ट्रेट, कोतवाली इंस्पेक्टर आदि रहे।
यहां हो रही मजलिस
चांद की तारीख जगह समय
नौ मुहर्रम तक नेशनल कॉलोनी सुबह आठ बजे
नौ मुहर्रम तक इमामबाड़ा फूल चौराहा सुबह 11 बजे
नौ मुहर्रम तक अकबर मार्केट दोधपुर दोपहर दो बजे
नौ मुहर्रम तक बैतुल सलात एएमयू शाम 4:15 बजे
नौ मुहर्रम तक शमशाद मार्केट 4:30 बजे
नौ मुहर्रम तक भमोला क्रासिंग मगरिब नमाज बाद
नौ मुहर्रम तक हुसैनी मस्जिद जोहरा बाग मगरिब नमाज बाद
नौ मुहर्रम तक इमामबाड़ा नगला मल्लाह मगरिब नमाज बाद
नौ मुहर्रम तक इमामबाड़ा धौर्रामाफी मगरिब नमाज बाद
नौ मुहर्रम तक इमामबाड़ा केलानगर मगरिब नमाज बाद
दस मुहर्रम तक कोठी रानी दुल्हन रात आठ बजे
नौ मुहर्रम तक इमाबाड़ा अख्तर रजा रात आठ बजे
दस मुहर्रम इमामबाड़ा हुसैनिया जेहरा केलानगर रात नौ बजे
नौ मुहर्रम तक इमामबाड़ा भुजपुरा रात 8:30 बजे
नौ मुहर्रम तक इमामबाड़ा मोहम्मद हुसैन रात नौ बजे
चौथी मुहर्रम का वाकया
करबला की सरजमीं पर चौथी मुहर्रम को इमाम हुसैन की बहन हजरत जैनब के बेटे हजरत औन और हजरत मोहम्मद शहीद हो गए थे। जब दोनों मासूम बच्चे जंग में जाने की इजाजत मांगने अपने मामू जान (इमाम हुसैन) के पास गए तो उन्होंने मना कर दिया। बोले, बच्चों अभी आप बहुत छोटे हैं। जंग में आपको नहीं भेज सकता।
इसके बाद बहन हजरत जैनब ने भाई इमाम हुसैन से हजरत औन और हजरत मोहम्मद को जंग में जाने की इजाजत की गुजारिश की। इसके बाद इमाम हुसैन ने इजाजत दे दी। मासूम बच्चों ने यजीदी फौज से डटकर मुकाबला किया। मगर, जंग में मासूम शहीद कर दिए जाते हैं।