प्रशासन की सख्ती से क्लीनिक एवं नर्सिंग होम संचालकों में हड़कंप
ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
बायो मेडिकल वेस्ट रूल्स को लेकर प्रशासन की सख्ती से क्लीनिक एवं नर्सिंग होम संचालकों में हड़कंप की स्थिति है। दो दिन में 40 से अधिक क्लीनिक एवं नर्सिंग होम पर छापेमारी की गई है। इसके लिए चार अलग-अलग टीमों का गठन किया गया है।
हाईकोर्ट की कचरा निस्तारण पर सख्ती के बाद प्रशासनिक अधिकारी सक्रिय हो गये है। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा करीब 111 अस्पताल, नर्सिंग होम, पैथोलैब आदि को नोटिस दिया गया है।
इसके साथ ही जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम, पशु चिकित्सा विभाग एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों की चार अलग-अलग टीमों का गठन किया गया है।
बायो मेडिकल रूल्स 2016 के प्रावधानों के अंतर्गत प्रत्येक अस्पताल, नर्सिंग होम, पैथोलैब आदि का बायो मेडिकल वेस्ट डिस्पोजल के लिए कॉमन बायो मेडिकल वेस्ट फैसिलिटी से संबद्ध होकर बोर्ड से प्राधिकार एवं जल तथा वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) सहमति प्राप्त करना अनिवार्य है।
अधिकारियों के निशाने पर वैसे क्लीनिक व नर्सिंग होम हैं, जिन्होंने बायो मेडिकल वेस्ट रूल्स 2016 के अनुपालन में बोर्ड से जल व वायु सहमति एवं प्राधिकार प्राप्त नहीं किये हैं। छापेमारी के दौरान अन्य कई अनियमितताएं भी सामने आ रही हैं।
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी राम गोपाल ने बताया कि चार अलग-अलग टीम नर्सिंग होम एवं क्लीनिक में छापेमारी के लिए गठित की गई हैं। दो दिन में करीब 40 स्थानों पर छापेमारी की गई है।
अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर दोषी लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इधर विभागीय दबाव बनने के बाद क्लीनिक, नर्सिंग होम एवं लैब संचालक कागजी कार्रवाई पूरा करने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दफ्तर का चक्कर लगा रहे हैं।
जेएनएमसी, जिला अस्पताल व डीडी अस्पताल को भी नोटिस
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जिन 111 अस्पताल, नर्सिंग होम व क्लीनिक को नोटिस दिया गया है, उसमें एएमयू का जेएन मेडिकल कॉलेज, मलखान सिंह जिला चिकित्सालय, पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय, मोहनलाल मेमोरियल गांधी नेत्र चिकित्सालय भी शामिल है। रामघाट रोड, आगरा रोड व महानगर के अन्य क्षेत्रों में स्थित मशहूर प्राइवेट नर्सिंग होम एवं क्लीनिक संचालक भी मानक का पालन नहीं कर रहे हैं।