जीएसटी के नौ दिन : राहत कम आफत ज्यादा
ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़।
जीएसटी लागू होने का असर स्कूल जाने वाले बच्चों की ड्रेस पर भी हुआ है। कॉपी-किताब दायरे से बाहर है, ये राहत की बात है। वहीं, महिलाओं के प्रयोग में आने वाले सेनेटरी पैड्स पर 12 फीसदी जीएसटी लागू होने पर सोशल मीडिया पर अलग अलग मैसेज चल रहे हैं, जिसमें इसका विरोध हो रहा है। एक तरफ स्वच्छता को बढ़ावा देने वाली सरकार ऐसे जरूरी सामानों पर 12 फीसदी का बड़ा टैक्स क्यों लगा रही है?
खाद्य पदार्थ : कुछ महंगा
कई ऑफर्स में कटौती कर दी गई है। कोल्ड ड्रिंक के ऑफर खत्म हो गये हैं। अब इस पर 3 से 5 फीसदी तक छूट है। आटा, सूजी, बेसन, रवा और पैकेटबंद ब्रांडेड दाल चावल पर 5 प्रतिशत जीएसटी है। ये सामान महंगे हुए हैं, तो फुटकर की दुकानों पर अब भी पुरानी एमआरपी पर ही माल बेचा जा रहा है।
रेस्टोरेंट : अब किफायती
पहले रेस्टोरेंट में 29.50 फीसदी और सर्विस चार्ज मिला कर लगभग 31 फीसदी तक कर वसूली हो जाती थी लेकिन अब समाधान योजना या 18 फीसदी कर का स्लैब अपनाने वाले व्यापारियों के यहां खाना पीना सस्ता हुआ है। रेस्टोरेंट संचालक विवेक बगाई ने बताया कि जो सामान वो लोग खरीद रहे हैं उसके बिल नहीं मिलने से उलझन है। कुछ सामान की कमी बनी हुई है। दीपावली तक काम ढर्रे पर लौटने की उम्मीद है।
ब्रांडेड कपड़े : 50 फीसदी तक छूट
ब्रांडेड रेडीमेड कपड़ों के पुराने स्टाक पर 25 से 50 फीसदी तक छूट के ऑफर से शो रूम गुलजार हैं। सर्दियों के वूलेन कपड़ों पर जीएसटी का असर दिखेगा। बिना ब्रांड वाले कपड़ों के व्यापारियों का विरोध जारी है, लेकिन दुकानें खुल रही हैं क्योंकि इनको भी अपना पुराना माल निकालना है।
सराफा : बाजार में हलचल नहीं
सराफा बाजार में हलचल नहीं है। सोने पर जीएसटी 3 प्रतिशत है। वहीं, मेकिंग चार्ज पर 5 प्रतिशत है। जीएसटी के बाद से सोने में करीब 500 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी में करीब 2,500 रुपये प्रति किलोग्राम की गिरावट आई है। अब सोने का रेट 28,800 रुपये प्रति दस ग्राम और चांदी 36,500 रुपये प्रति किलो पर है। कारोबार में गिरावट आई है।
रियल एस्टेट : मंदी की मार बरकरार
शहर के रियल एस्टेट कारोबार में पूर्व की भांति ही मंदी का दौर जारी है। पुराने प्रोजेक्ट पूरे तक नहीं हो पा रहे हैं। नये प्रोजेक्ट भी बहुत कम आ रहे हैं। सरकारी आवासीय योजनाएं नहीं होने से औसत मांग बनी हुई है, लेकिन सस्ते दामों वाले फ्लैट और मकान ही बिक रहे हैं।
बयान---
जीएसटी अपनाया जा रहा है, लेकिन अभी इसको लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। अधिकारियों की कमी होने के कारण बहुत से नियम और कर की दरें स्पष्ट नहीं हो पा रही हैं। कुछ जरूरी सामानाें को 28 फीसदी के स्लैब से कम करने की जरूरत है।
-प्रदीप गंगा, अध्यक्ष उद्योग प्रतिनिधि मंडल कंछल गुट।
बाजार में मंदी है। सभी तरह के व्यापार फिलहाल भ्रम में हैं। बिल काटने और माल पहुंचाने में परेशानी हो रही है। सोने-चांदी की कीमतें कम होने के बाद ग्राहक नहीं है। दीपावली से पहले कारोबार रफ्तार पकड़ सकता है।
-विजय अग्रवाल, अध्यक्ष अलीगढ़ सराफा बाजार।
स्कूल ड्रेस पर पांच फीसदी जीएसटी लागू हुआ है। पहले ये कर नहीं लगा था। ड्रेस महंगी हुई है। कॉपी-किताब पर कोई कर नहीं है इसलिए उसके दामों में ज्यादा बढ़ोत्तरी नहीं हुई है।
-संजय सिंघल, व्यापारी।
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