उत्तर प्रदेश की सपा सरकार भूमि अधिग्रहण मामले में अब गुजरात मॉडल अपनाएगी। गुजरात, बंगाल और पुणे की तर्ज पर भूमि अधिग्रहण की इस नीति में किसान अधिग्रहीत भूमि में बिजनेस पार्टनर होगा।
अधिग्रहीत कुल जमीन में डेवलपमेंट कराकर 30 प्रतिशत भूमि किसान को वापस कर दी जाएगी। यह किसान की मर्जी पर निर्भर करेगा कि वह उसे बेचे अथवा बनाए रखे। यही नहीं डेवलपमेंट से होने वाले फायदे में भी उसे हिस्सेदार बनाया जाएगा।
वृंदावन में श्रीपाद बाबा के आश्रम में मीडिया से रूबरू प्रमुख सचिव आवास एवं अधिसूचना सदाकांत ने ये जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि किसी भी किसान से जबरन भूमि नहीं ली जाएगी। उसे विश्वास में लेकर भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। भूमि की कीमत भी किसान स्वयं तय करेगा। प्रदेश सरकार जून में ही कांप्रिहेंसिव हाउसिंग पालिसी लाने जा रही है।
मिक्स्ड यूज पॉलिसी पर मंथन
प्रमुख सचिव आवास एवं अधिसूचना सदाकांत ने बताया कि प्रदेश में आवासीय योजनाओं में मिक्स्ड यूज पालिसी पर विचार हो रहा है। इस पालिसी में लोग जरूरत पड़ने पर आवासीय कालोनियों में बने अपने आवास में कामर्शियल यूज के लिए दुकानें भी बनवा सकेंगे।
आवास निर्माण के लिए नक्शों की अनिवार्यता प्रक्रिया को भी लचीला बनाने पर मंथन चल रहा है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में विप्रा अफसरों की कार्यप्रणाली शोषण एवं उत्पीड़न की है। कभी वे नक्शे तो कभी अन्य नियमों का हवाला देकर जनता से छलावा करते हैं। इससे निपटने के लिए ही मिक्स्ड यूज पालिसी पर सरकार विचार कर रही है।
प्राधिकरणों में खुलेगी हेल्पलाइन
जमीन खरीद समेत अन्य आवासीय नियमों से आमजन को परिचित कराने के लिए प्राधिकरणों में हेल्पलाइन खोली जाएगी। यहां तैनात विशेषज्ञ लोगों को आवास एवं जमीन संबंधी मामलों में राय देंगे।