भारत में एक बांग्लादेश बन रहा जो प्रत्यक्ष दिख नहीं रहा है। वहां राम, कृष्ण और शिव कथाओं के आयोजन नहीं होते हैं। वैसे राम-कृष्ण और शिव कथा से ज्यादा आवश्यकता इस वक्त राष्ट्र कथा की है। हालांकि सभी का आधार एक ही है। ये बातें श्रीआनंदम धाम वृंदावन के पीठाधीश्वर सदगुरु ऋतेश्वर जी महाराज ने कही।
पीठाधीश्वर रविवार को कमला नगर आए थे। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि राष्ट्र कथा में युवाओं को बताया जाता है कि वह राष्ट्र धर्म को मस्तक पर रखकर उसे ऊंचाइयों पर ले जाएं। देश में वैज्ञानिक अवधारणा स्थापित हो। युवाओं का जीवन दर्शन बदले। युवाओं को शिक्षार्थी के साथ विद्यार्थी बनने की जरूरत है। शिक्षार्थी बनकर केवल किसी के बारे में कुछ सीख सकते हैं लेकिन विद्यार्थी बनने से जीवन में संस्कार और उच्च जीवन पद्धति आएगी। सनातन की परंपरा विद्यार्थी की रही है शिक्षार्थी की नहीं।
उन्होंने कहा कि अगर हम संस्कृति, सनातन का संरक्षण नहीं कर सके, उसके बीज को नहीं बचा सके तो एक दिन विचारधारा का अंत हो जाएगा। कभी पड़ोसी देशों में सनातनी व अन्य धर्म के लोग बड़े आनंद से रहते थे लेकिन उन्हें पलायन करना पड़ा। लाहौर में मंदिर तोड़े जा रहे हैं। बांग्लादेश भी उसी दिशा में है। अगर देश का हिंदू इतिहास से सीखकर राष्ट्र से नहीं जुड़ा तो फिर राष्ट्र के विखंडन में देर नहीं लगेगी।
उन्होंने कहा कि पहले भी कई बार राष्ट्र विभाजन हुए हैं। इतिहास की भूलों से सीखकर हिंदुओं को व्यक्तिगत झूठे स्वार्थों की उलझन से बाहर निकलना होगा। हिंदू होना गौरव की बात है, उसकी जिम्मेदारी निभाना जरूरी है। जो समाज जिम्मेदारी नहीं निभाता वह सामाजिक और पारिवारिक जीवन में दुखी रहता है।
हिंदू सम्मेलन राष्ट्रवादियों का कार्यक्रम
पीठाधीश्वर ने कहा कि विराट हिंदू सम्मेलन आम हिंदू और राष्ट्रवादियों का कार्यक्रम है। सभी हिंदू जातिवाद, भाषा, क्षेत्र व प्रांत वाद को भुलाकर राष्ट्र सुरक्षा के लिए संगठित हो रहे हैं। वह चेतना संपन्न होकर दूसरों को जगाएं। विश्व को नया मार्ग दें। देश हिंदुओं से पुष्पित, पल्लवित और पोषित हुआ तो विश्व में शांति, प्रेम की सुगंध फैलेगी।