पोस्टमार्टम गृह पर पंकज कुमार का परिवार, पंकज का फाइल फोटो
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आगरा में सिकंदरा के अरतौनी स्थित नशा मुक्ति केंद्र साधना फाउंडेशन रिकवरी केयर में भर्ती फिरोजाबाद के युवक पंकज कुमार का शव सोमवार शाम पांच बजे फंदे से लटका मिला। केंद्र से परिजनों को बताया गया कि वह बीमार है। परिजनों का आरोप है कि उसे केंद्र में पीटा जाता था, वे केस दर्ज कराएंगे जबकि केंद्र के कर्मचारियों ने घटना खुदकुशी की बताई है।
फिरोजाबाद के नगला खंगर स्थित गांव नगला गुलाल निवासी पंकज उर्फ बबलू (20) पुत्र रामप्रताप को नौ अगस्त को केंद्र में भर्ती कराया गया था। केंद्र के कर्मचारियों ने बताया कि उसने खुदकुशी की। वे उसे एसएन लेकर गए थे। डॉक्टरों ने बताया कि उसकी मृत्यु हो चुकी है। मृतक के पिता रामप्रताप ने बताया कि केंद्र निदेशक विवेक चौहान ने छह महीने में नशे की लत छुड़ाने का दावा किया।
पांच महीने के लिए 72 हजार रुपये जमा करने के लिए बोला। 12 हजार जमा करा कर दिए। सोमवार रात सूचना दी पंकज की तबीयत खराब है। वे आए तो एसएन की मोर्चरी में शव रखा मिला। पंकज को केंद्र में पीटा जाता था। उसने फोन पर इसकी जानकारी दी थी।
घटना से पहले की सीसीटीवी फुटेज मिलीं
थाना सिकंदरा के प्रभारी कुलदीप कुमार का कहना है कि केंद्र के कर्मचारियों ने बताया कि पंकज और एक अन्य युवक कमरे में थे। पंकज ने खुदकुशी कर ली। खुदकुशी से पहले की सीसीटीवी कैमरे की फुटेज भी मिली है। निदेशक विवेक चौहान सामने नहीं आया है।
फौज में भर्ती होना चाहता था पंकज
पिता रामप्रताप ठेकेदारी करते हैं। उन्होंने बताया कि पंकज तीन भाई और एक बहन में सबसे छोटा था। इंटर पास पंकज फौज में जाना चाहता था। उसकी नशे की लत के बारे में एक साल पहले पता चला।
केंद्र से आती हैं चीखने की आवाज
थाना प्रभारी ने बताया कि अरतौनी के लोगों से जानकारी की गई। उन्होंने बताया कि नशा मुक्ति केंद्र में युवकों को पीटा जाता है। उनके चीखने की आवाज आती है।
दूसरे युवक ने क्यों नहीं रोका?
पंकज के साथ एक और युवक कमरे में था। सवाल उठ रहा है कि उसने पंकज को खुदकुशी से क्यों नहीं रोका? कर्मचारियों ने बताया कि वह सो रहा था। पुलिस का कहना है कि शाम पांच बजे इतनी गहरी नींद में कैसे सो गया? इस बारे में पूछताछ होगी।
केंद्र में चिकित्सकों का होना अनिवार्य : डॉ. दिनेश राठौर
मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के चिकित्साधीक्षक डॉ. दिनेश कुमार राठौर ने बताया कि मेंटल हेल्थ केयर एक्ट 2017 के तहत केंद्र में प्रशिक्षित स्टाफ होना चाहिए। मनोचिकित्सक, सामान्य चिकित्सक, मनोवैज्ञानिक, मनोचिकित्सकीय सामाजिक कार्यकर्ता, नर्सिंग स्टाफ होना चाहिए। उनकी देखरेख में ही किसी को रखा जा सकता है। मरीज का रोज का पूरा लेखा-जोखा होना चाहिए लेकिन ज्यादातर केंद्र में ऐसा नहीं हो रहा है।
पंजीकरण की जांच भी होगी
नशा मुक्ति केंद्र में मौत के मामले में परिजनों की तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज करेंगे। यह भी पता किया जाएगा कि केंद्र का पंजीकरण कराया गया था या नहीं। - सौरभ दीक्षित, एएसपी, सीओ हरीपर्वत