कालिंदी के काल का बने रहे सीवर को सीधे नदी में गिरने से रोकने के लिए जल्द कवायद शुरू होने वाली है। संसदीय कमेटी की नाराजगी के बाद उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) नदी में गिरने वाले नालों का सर्वे शुरू करने जा रहा है। सर्वे में सीवर से नदी में होने वाले प्रदूषण का भी अध्ययन किया जाएगा।
बता दें कि गंगा के साथ-साथ यमुना को उसका योवन लौटाने को केंद्र सरकार पुरजोर प्रयास कर रही है। यमुना प्रेमियों की ‘यमुना मुक्तिकरण’ यात्रा के बाद सरकार इसको लेकर और भी गंभीर है। पिछले दिनों ताजमहल का अध्ययन करने आई संसदीय कमेटी ने भी नदी में बढ़ते प्रदूषण पर चिंता जताई है। उन्होंने तमाम सुझावों के साथ-साथ नदी में गिरने वाले नालों को भी टेप करने को कहा था। इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट पहले ही निर्देश दे चुका है।
यूपीपीसीबी ने सर्वे की रूपरेखा पर मंथन शुरू कर दिया है। रूनकता से लेकर समोगर घाट तक नाव के जरिए यूपीपीसीबी की टीम भ्रमण करेगी। नदी में गिरने वाले सीवर, नालों की गिनती के अलावा जगह-जगह पानी के सैंपल लिए जाएंगे। बताया जा रहा है कि इसी सर्वे के आधार पर जल निगम नालों को टेप करेगा। बता दें कि इन नालों के माध्यम से फैक्ट्रियों से निकलने वाला केमिकल युक्त पानी भी नदी में जा रहा है। इससे न सिर्फ नदी का पानी जहरीला हो रहा है बल्कि खेती के लिए भी नुकसानदेह साबित हो रहा है।