यमुना के डूब क्षेत्र का सौ साल में आई बाढ़ को आधार मानकर निर्धारण किया गया है। अब एक तय सीमा में कोई भी निर्माण नहीं हो सकेगा। इसके साथ ही इस परिधि में आने वाले निर्माण पर भी संकट खड़ा हो गया है। हैरानी वाली बात तो ये है कि इनमें से कुछ भवन और इमारत एडीए से भी स्वीकृत हैं।
आगरा में पिछले 100 साल में आई बाढ़ को आधार मानकर यमुना के दोनों किनारों पर डूब क्षेत्र निर्धारित किया गया है। ऐसे में अब यमुना के दाएं किनारे पर अधिकतम 5.09 किमी और बाएं किनारे पर 2.55 किमी क्षेत्र में सभी तरह के नए निर्माण नहीं हो सकेंगे।
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आगरा की सीमा में यमुना नदी करीब 167 किमी लंबाई में बहती है। असगरपुर से प्रयागराज तक कुल लंबाई 1056 किमी और क्षेत्रफल 15,925 वर्ग किमी है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में तीन साल से डूब क्षेत्र को लेकर सुनवाई चल रही थी।
डॉ. शरद गुप्ता की याचिका पर सुनवाई करते हुए 11 सितंबर को डूब क्षेत्र तय करने का आदेश दिया था। जिसके बाद 21 दिसंबर को डूब क्षेत्र निर्धारण की अधिसूचना जारी की गई। 29 जनवरी को सिंचाई विभाग ने अनुपालन आख्या एनजीटी में प्रस्तुत की। इसके मुताबिक पिछले 100 साल में यमुना में आई बाढ़ को आधार मानकर दोनों किनारों पर डूब क्षेत्र निर्धारित किया गया है। किस इलाके में कितना डूब क्षेत्र आएगा। यह तय करने के लिए अक्षांश देशांतर (कॉर्डिनेट) चिह्नित हो चुके हैं।
अब यमुना किनारे नए निर्माणों पर संकट खड़ा होगा। जहां एक तरफ नए निर्माण प्रतिबंधित हो गए हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार दयालबाग क्षेत्र में जगनपुर, मनोहरपुर, खासपुर से लेकर नगला बूढ़ी तक 2010 में आई बाढ़ के दौरान पानी घुस गया था। इससे पहले 1978 में बाढ़ आई थी। तब बेलनगंज, बल्केश्वर, दयालबाग और रुनकता तक कई क्षेत्र प्रभावित हुए थे।
सेटेलाइट से हुआ डूब क्षेत्र निर्धारण
यमुना डूब क्षेत्र का निर्धारण सेटेलाइट से हुआ है। हैदराबाद की रिमोट सेंसिंग एजेंसी ने यह सर्वे किया है। जिसके बाद करीब 521 पन्ने की रिपोर्ट एनजीटी में पेश की गई। इससे पूर्व सिंचाई विभाग ने 1000 से अधिक मुड्डियां यमुना डूब क्षेत्र में लगाई थीं। लेकिन, स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं तय होने के कारण कार्रवाई नहीं हो सकी।
बड़ी संख्या में निर्माण एडीए से मंजूर
यमुना डूब क्षेत्र में 5000 से अधिक निर्माण खड़े हैं। इनमें बड़ी संख्या में निर्माण एडीए से स्वीकृत हैं। रुनकता से बाईंपुर होते हुए नगला बूढ़ी, मनोहरपुर, जगनपुर, खासपुर, बल्केश्वर, जीवनी मंडी तक नदी किनारे निर्माण हैं। 2016 में एनजीटी के आदेश पर एक दर्जन से अधिक अवैध निर्माण डूब क्षेत्र में ध्वस्त हुए थे।