आगरा में एक बार फिर यमुना उफान पर आ गई है। जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। तटवर्ती इलाकों में अफरातफरी है। वॉटर वर्क्स पर यमुना चेतावनी स्तर से सिर्फ डेढ़ फुट नीचे बह रही है। रविवार को मथुरा स्थित गोकुल बैराज से यमुना में सीजन का सबसे अधिक 69,029 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे खतरा और बढ़ने की आशंका है।
पहाड़ों पर बारिश से बैराजों पर स्थित जलाशयों में फिर पानी का दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में एक-एक कर हथिनीकुंड (ताजेवाला) बैराज और ओखला बैराज से यमुना में पानी छोड़ा जा रहा है। इसका असर मथुरा और आगरा तक दिखाई दे रहा है। यमुना में जलस्तर बढ़ने से नदी के तटवर्ती इलाकों में खलबली मच गई है।
बाढ़ नियंत्रण के लिए कंट्रोल रूम से लेकर तटवर्ती इलाकों में बाढ़ चौकियां तक प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है। बाढ़ नियंत्रण प्रभारी एवं एडीएम वित्त शुभांगी शुक्ला ने बताया कि यमुना जलस्तर सोमवार को बढ़ सकता है। हालांकि, खतरे की बात नहीं है। बाढ़ का चेतावनी स्तर 495 फीट है। पिछले 24 घंटे में चार इंच जलस्तर बढ़ा है। मध्यम बाढ़ का स्तर 499 और उच्च बाढ़ का स्तर 508 फीट है।
यमुना किनारे बसे बल्केश्वर, फाउंड्री नगर व दयालबाग क्षेत्र के निचले इलाकों में सबसे पहले यमुना उफनाने पर पानी घुसता है। यमुना में बाढ़ आने पर 40 से अधिक गांव प्रभावित होते हैं। पिछले सप्ताह भी यमुना उफान पर आई थी। जलस्तर 494.5 फीट तक पहुंच गया था लेकिन पहाड़ों पर बारिश का सिलसिला थमने के बाद यमुना का जलस्तर कम हो गया। जलस्तर में शुक्रवार रात से दोबारा वृद्धि हो रही है।