मंच पर तीन पीढ़ियां एक साथ
अब कलाकारों की तीन अलग-अलग पीढ़ियां भगत की प्रस्तुति दे रही हैं। 65-70 साल के पुराने भगत कलाकारों के अलावा 20-30 वर्ष के कलाकार हैं जो नई भगत का प्रशिक्षण ले चुके हैं। किशोर और युवाओं में भगत को जानने, सीखने की ललक बढ़ी है। शहर की 8 मलिन बस्तियों के 100 किशोरों को बीते 2 सालों से गायन, अभिनय और नृत्य का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ताज महोत्सव, जश्न-ए-फैज, बरसाना महोत्सव समेत देशभर के मंच पर ये कलाकार प्रस्तुति दे चुके हैं।
कारापोरेट, सरकार भगत को बचाने आगे आए
रंगलीला के कलाकार अनिल शुक्ला ने बताया कि हमने वक्त के साथ भगत में बदलाव किए। मूल स्वरूप, मूल गायकी को छेडे़ बिना नए विषय, नए मेकअप, परिधान में बदलाव किया। युवाओं को जोड़ा। हालांकि लोक नाट्य की प्रगति पर संकट अब भी है। कारपोरेट और सरकार दोनों को इसके लिए आगे आना चाहिए।
नायिका की भूमिका रोमांचित कर देती है
कलाकार कोमल यादव ने कहा कि बरसाना के रंगोत्सव में पहली बार मुख्य भूमिका निभाना अनोखा अनुभव रहा। नौ साल की उम्र से मैं रंगलीला के साथ भगत कर रही हूं लेकिन सोलह साल की उम्र में हजारों दर्शकों के बीच नायिका की भूमिका करना रोमांचित करता है।