दोस्तों, स्कूल या सार्वजनिक स्थानों पर किशोरों को डांट-डपट कतई न करें। आपके लिए भले ही सामान्य हो लेकिन इसे बेइज्जती मान किशोर आत्मघाती कदम उठाने में हिचक नहीं दिखाते।
चिकित्सक मानते हैं कि आत्महत्या और हिंसक घटनाओं के पीछे एक बड़ी वजह यह भी है। इसे देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर आत्महत्या की रोकथाम को सम्मिलित प्रयास थीम दी है।
डब्ल्यूएचओ के मुताबिक हर 40 सेकंड में एक आत्महत्या हो रही है। इसमें 15 से 29 साल आयुवर्ग के ज्यादा हैं। वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. यूसी गर्ग ने बताया कि रोजाना ऐसे दो से पांच मरीज रहते हैं, जो पिता की डांट के बाद किशोर गुमशुम या फिर उनका स्वभाव गुस्सैल और चिड़चिड़ा होने के बाद अभिभावक लेकर पहुंचते हैं। गुमसुम रहने वाले किशोर आत्महत्या जैसे कदम जल्द उठाते हैं।
काउंसलिंग में पता चला कि अभिभावक-शिक्षकों की डांट से खुद को बेइज्जत महसूस करने लगे थे। मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. दिनेश राठौर ने पिछले महीने में ऐसे मामले आए, जिसमें पिता की डांट, कम अंक लाने पर डपटना, शिक्षकों ने दूसरे से तुलना करते हुए डांटा, बाद में उसने आत्महत्या कर ली। दरअसल, किशोरावस्था में हार्मोंस बदलाव के चलते वह ज्यादा संवेदनशील होते हैं।
डब्ल्यूएचओ ने आत्महत्या की रोकथाम के लिए एक्शन 40 सेकंड का मंत्र दिया है। इसमें आत्महत्या की बात करने वाले से बातचीत करें, उसकी पीड़ा जाने और सकारात्मक सोच जगाएं। ऑफिस में कर्मचारी मानसिक तनाव से गुजर रहा है तो उसकी पारिवारिक या ऑफिस की वजह जाने और उससे मित्रवत होकर बात करें।
इन बातों का रखें ख्याल:
- किसी बात पर डांटने के आधा घंटे बाद उसे दुलारें, समझाएं।
- किशोरों की शारीरिक, बौद्धिक स्तर पर टिप्पणी न करें
- जिद नहीं जरूरत पूरी करें, ऐसा न करने पर किशोरावस्था में ना सुनने की आदत नहीं रहती।
- पढ़ाई में प्रतिशतता पर जोर न दें, लिखित परीक्षा का समय है, कम अंक वाले भी बेहतर मुकाम पाते हैं।
यह नजर आए तो हो जाएं सावधान:
- गुमसुम रहे, गुस्सा करे, बातचीत कम करे।
- भूख कम लगे, दिनचर्या प्रभावित होने लगे।
- देर रात तक जागता रहे, भावुक होने लगे।
- जीवन को बेकार बताए,
- युवावस्था में ही अंगदान करने की बात कहे।