पहले चित्र में मंत्री द्वारा लगाए पौधा (फाइल) और वर्तमान में उसकी स्थिति
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मैनपुरी में हरियाली साल दर साल घटती जा रही है। आरक्षित वन क्षेत्र भी आधा प्रतिशत तक ही समिट कर रह गया है। हर साल हरियाली बढ़ाने के लिए लगाए जाने वाले पौधे भी देखरेख के अभाव में वृक्ष बनने से पहले ही दम तोड़ रहे हैं। दूसरी और रोड चौड़ीकरण व निजी कार्यों के लिए हजारों पेड़ अब तक काटे जा चुके हैं।
आगरा मंडल के सभी जिलों में से मैनपुरी में हरियाली सबसे कम है। यहां केवल 1428 हेक्टेयर क्षेत्रफल ही आरक्षित वन क्षेत्र है, जो जिले के कुल क्षेत्रफल का महज आधा प्रतिशत है। साल दर साल वन विभाग और अन्य विभाग लाखों पौधे रोपता है। लेकिन देखरेख के अभाव में ये सूख जाते हैं। वन विभाग ग्राम समाज की भूमि पर पौधे रोपता है। इसे तीन वर्ष बाद ग्राम समाज को वापस दे दिया जाता है। अन्य विभागों की ओर से रोपे गए पौधों को देखने की जिम्मेदारी संबंधित विभाग की ही होती है। विभागों की अनदेखी के ये पौधे या तो सूख जाते हैं या जानवर इन्हें तोड़ जाते हैं। बीते साल ही वन विभाग ने 35.39 लाख पौधे रोपे थे। इसमें 21.99 लाख पौधे अन्य विभागों ने लगाए थे, इनमें से अधिकांश पौधे खत्म हो चुके हैं।
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तीन सालों में काटे 16 हजार से अधिक पेड़
पेड़ों के लगातार कटान से हरियाली लगातार कम होती जा रही है। बीते तीन सालों में रोड चौड़ीकरण में 16 हजार से अधिक पेड़ काटे गए। इसमें जीटी रोड चौड़ीकरण के लिए 11377 पेड़ काटे गए। भोगांव-शिकोहाबाद फोरलेन के लिए पांच हजार के करीब पेड़े काटे गए। इसके अलावा निजी कार्यों के लिए भी लोगों ने पेड़ों का अंधाधुंध कटान किया यह लगातार जारी है।