विश्व पर्यावरण दिवस पर आज पर्यावरण को सहेजने, पौधे लगाने के लिए गोष्ठियों, कार्यशालाओं में बातें कई हो रही हैं। लेकिन पर्यावरण को बचाने के लिए जमीनी कदम उठाए नहीं जा रहे।
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बीते साल 9 करोड़ पौधे लगाने के अभियान में जोर शोर से जिन्होंने फोटो खिंचवा कर पौधे लगाए, उन्हें ही नहीं सहेज पाए। सड़क किनारे के ज्यादातर पौधे सूख गए तो ट्री गार्ड के बिना लगाए गए पौधे लापता हो गए। हालांकि, सरकारी रिपोर्ट में पौधे खूब फल फूल रहे हैं।
सूबे की सरकार ने बीते साल 9 करोड़ तो इस बार 22 करोड़ पौधे लगाने का अभियान चलाया है। आगरा में पिछले साल 13.21 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य दिया गया था, लेकिन सरकारी रिपोर्ट में कहीं ज्यादा 13.30 लाख पौधे लगाने का दावा किया गया।
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कई जगह पड़ताल की तो पाया कि ट्री गार्ड के बिना लगाए गए पौधे अब मौके पर ही नहीं हैं, वहीं डिवाइडर पर लगाए पौधे सूख गए हैं। बोदला सिकंदरा रोड, पंचकुइयां जीआईसी रोड, सदर क्षेत्र, सुल्तानपुरा-रेलवे स्टेशन रोड, अवधपुरी रोड, मारुति एस्टेट रोड, वजीरपुरा क्षेत्र में लगाए गए ज्यादातर पौधे सूख गए हैं।
हैरतअंगेज पहलू यह है कि शहरी क्षेत्र की जिम्मेदारी नगर विकास विभाग की थी, जिसने न केवल लक्ष्य से कम पौधे लगाए, बल्कि जिओ टैगिंग भी कम जगहों की कराई। दरअसल, जिओ टैगिंग तकनीक से पौधरोपण की सही लोकेशन पता चल जाती है, लेकिन अगस्त 18 की रिपोर्ट इस साल जून तक भी पूरी नहीं हो पाई।
पिछले साल ताजनगरी में 13.21 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य दिया गया था, लेकिन सामाजिक वानिकी विभाग ने शासन को जो रिपोर्ट भेजी है, उसके मुताबिक लक्ष्य से ज्यादा 13.30 लाख पौधे लगाए गए।
इसमें वन विभाग ने 5.48 लाख की जगह कहीं ज्यादा 5.56 लाख पौधे लगाए हैं। ग्राम्य विकास, पशुपालन, माध्यमिक शिक्षा, उच्च शिक्षा, श्रम विभाग, रक्षा विभाग, उद्यान विभाग, पंचायती राज विभाग ने लक्ष्य से ज्यादा पौधे लगाने का दावा किया है।
मनीष मित्तल सहायक वन अधिकारी, सामाजिक वानिकी विभाग का कहना है कि पौधरोपण में फर्जीवाड़ा न हो, इसलिए जिओ टैगिंग की रिपोर्ट मांगी गई है। कई विभागों को लगातार कहा जा रहा है। शासन को पूरी रिपोर्ट दी गई है। पौधे जो जीवित नहीं रहे, उन्हें हम लगातार बदल रहे हैं।