कैंसर एक ऐसी बीमारी है, जिसका नाम सुनते ही रूह कांप उठती है। वजह है मरीज पहले ही मान लेते हैं कि अब इस बीमारी का इलाज नहीं है और मौत निश्चित है। लेकिन ऐसा नहीं है। यदि इस बीमारी के लक्षणों को समय से पहचान लें, तो जान बच सकती है...
कैंसर...इसका मतलब जीवन का अंत नहीं। डॉक्टर मानते हैं कि समय रहते इलाज से मरीज ठीक हो रहे हैं। ऐसे ही कैंसर फाइटर हैं, जिन्होंने इलाज और हौसले की डोज से बीमारी को हराया। बीमारी के दर्द से छुटकारे के बाद उनकी जिंदगी मुस्कुराने लगी है।
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आगरा कैंसर सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. संदीप अग्रवाल ने बताया कि हर महीने 500-550 नए मरीज आ रहे हैं। तमाम जागरूकता के बावजूद करीब 70 फीसदी मरीज अंतिम स्टेज पर ही आते हैं। लक्षण दिखने पर ही मरीज आ जाएं तो मर्ज पूरी तरह ठीक हो जाता है। औसतन 20-25 फीसदी स्वस्थ जीवन जी रहे हैं।
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एसएन मेडिकल कॉलेज की कैंसर रोग विभागाध्यक्ष डॉ. सुरभि गुप्ता ने बताया कि तंबाकू, धूम्रपान समेत अन्य वजहों से कैंसर के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। बीते साल 1864 नए मरीज आए। इनमें से 60 फीसदी मुख, 9-10 फीसदी ब्रेस्ट कैंसर, 8-9 फीसदी सर्वाइकल कैंसर, 5 फीसदी फेफड़े और बाकी के पित्त की थैली, भोजन की नली, बड़ी आंत के कैंसर के मरीज रहे। ..........
एक-दो घंटे की जिंदगी...पर हिम्मत नहीं हारी
राजा के ताल फिरोजाबाद निवासी मीनू गुप्ता (43) बोलीं कि 2009 में फेलोपिन ट्यूब का कैंसर था। डॉक्टर ने एक-दो घंटे की मेहमान बताया। ईश्वर पर भरोसा था और हिम्मत नहीं हारी। इलाज लेती रही, हौसला नहीं छोड़ा। अब पूरी तरह ठीक हूं। मरीजों से यही कहना है कि इलाज से न बचें और सकारात्मक सोचना बंद न करें।
छिपाएं नहीं, डॉक्टर को दिखाएं
मोहन नगर निवासी मोहन अग्रवाल (52) ने बताया कि मुख का कैंसर हो गया था। जांच के बाद डॉक्टरों ने बीमारी की जानकारी दी। सोचा अब क्या होगा, लेकिन मैंने हिम्मत नहीं हारी। डॉक्टर ने 2016 में ऑपरेशन किया और उपचार लेता रहा। अब मैं पूरी तरह ठीक हूं, कोई दिक्कत नहीं है। मरीज बीमारी को छिपाएं नहीं, डॉक्टर को दिखाएं।
इच्छाशक्ति से भी ठीक हो रही बीमारी
एसएन मेडिकल कॉलेज की कैंसर रोग विभागाध्यक्ष डाॅ. सुरभि गुप्ता ने कहा कि जांच के बाद कीमोथेरेपी-रेडियोथेरेपी और जरूरत पर ऑपरेशन भी होते हैं। मरीजों की काउंसिलिंग भी करते हैं। उपचार, पौष्टिक आहार और मरीज की इच्छाशक्ति से बीमारी ठीक भी हो रही है।
ऑपरेशन कराने वाले 60 फीसदी हैं युवा
एसएन मेडिकल कॉलेज के कैंसर सर्जन डॉ. वरुण अग्रवाल ने बताया कि सर्जरी कराने वाले मरीजों में ओरल, ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर के सर्वाधिक हैं। इनमें 50-60 फीसदी मरीजों की उम्र 30-40 साल है। अधिकांश मरीज तीसरी स्टेज के बाद ही आते हैं।
ये हैं लक्षण :
- मुंह का कम खुलना, छाले-घाव ठीक न होना।
- मुंह में सफेद, लाल धब्बे होना।
- भोजन निगलते समय दर्द होना।
- स्तन में बिना दर्द वाली गांठ, कांख में गांठ। रंग लाल होना।