कोरोना काल में एड्स को लेकर कई मामले सामने आए हैं, जो लोग कमाने या पढ़ने के लिए परदेश गए थे, उनमें सैकड़ों लोग गलत आदतों की वजह से एड्स का शिकार हो गए। लॉकडाउन लगने पर वह घर लौटे तो स्थानीय जिले में दवा की शुरुआत की। पता चलने पर परिजनों के होश उड़ गए।
कोरोना कॉल में प्रवासी अपने घर लौटे। कई महीनों तक घर पर रहे तो शासन ने स्थानीय अस्पताल से दवा लेने के आदेश दिए थे। अप्रैल, मई, जून में एड्स की दवा लेने वाले मरीजों की संख्या 300 तक पहुंच गई, जो अभी तक सर्वाधिक है। इनमें अधिकतर लोग विद्यार्थी या अन्य प्रदेशों में नौकरी करने वाले थे। मरीज के एड्स की दवा लेने का पता परिजनों को चला तो उनके होश उड़ गए।
जिला अस्पताल की काउंसलर रेनू तिवारी ने बताया कि एचआईवी के मरीजों की जांच गुप्त रखी जाती है। इस बार लॉकडाउन में मरीजों की संख्या जनपद में बढ़ गई थी, जो केस आ रहे हैं, उनमें अधिकतर लोग ऐसे हैं, जो घर से बाहर रहते हैं।
इस साल 28 नए मरीज मिले
वर्ष 2017 में एचआईवी पॉजिटिव के 72, वर्ष 2018 में 68, वर्ष 2019 में 38 रोगी मिले। इस बार कोरोना कॉल में अधिक जांचें नहीं हुईं। इसके बावजूद भी 28 रोगी चिह्नित किए गए। इसमें युवा, महिला और पुरुष शामिल हैं।
सावधानी ही बचाव
सावधानी ही एड्स से बचाव का तरीका है। मल्टी पार्टनर होने या एड्स संक्रमित का रक्त चढ़वाने, सामूहिक रूप से नशा करने वालों में एचआईवी की संभावना अधिक होती है। अगर किसी गर्भवती को एड्स है। ऐसे में उसका और उसके बच्चे का सही समय पर इलाज हो तो बच्चा संक्रमित होने से बच सकता है। एड्स के लक्षण होने पर डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। -डॉ. पूनम अग्रवाल, महिला रोग विशेषज्ञ
जागरूकता के बाद भी लोग एचआईवी का शिकार हो रहे हैं, जो चिंतनीय है। इंजेक्शन डिस्पोजल सिरिंज का इस्तेमाल करना चाहिए। एड्स से संक्रमित व्यक्ति का रक्त चढ़वाने से एड्स हो सकता है। एचआईवी का लक्षण है, जिसमें व्यक्ति को बार-बार बुखार आता है। वजन तेजी से कम होता है। -डॉ. मिली अग्रवाल, महिला रोग विशेषज्ञ