एड्स रोगी महिला यदि जागरूक हो तो वह अपनी बीमारी को संतान में जाने से बचा सकती है। इस बार एसएन मेडिकल कॉलेज में अभी तक एड्स रोग से पीड़ित 272 महिलाओं के प्रसव कराए जा चुके हैं। इसमें से 152 की संतान पूरी तरह से स्वस्थ है। चार की संतान ही संक्रमित हुई। डॉक्टरों ने बताया कि संक्रमित महिला का गर्भधारण के दौरान सीडी-4 जांच कराने के बाद इनका इलाज चलता है। प्रसव के बाद 18 महीने तक बच्चे की भी जांच और दवाएं चलती हैं।
समलैंगिकों में दोगुने बढ़े एड्स के मामले
समलैंगिक संबंधों से एड्स की बीमारी तेजी से फैल रही है। बीते साल के मुकाबले इस साल इस तरह के दोगुने मरीज मिले हैं। एसएन के एआरटी सेंटर में 163 मरीज पंजीकृत हैं। बीते साल इनकी संख्या 128 थी, जिसमें 16 नए मामले थे। इस बार 28 नए मामले मिले हैं।
केस एक:
गढ़ी भदौरिया की 27 साल की महिला को उसके पति से यह बीमारी मिली। उन्होंने बताया कि जांच में पुष्टि होने पर हार मान ली, लेकिन काउंसिलिंग और चिकित्सकीय निगरानी में बेटे को जन्म दिया। वह पूरी तरह से स्वस्थ है।
केस दो:
प्रकाश नगर की 23 साल की महिला ने बीमार रहने पर जांच कराई तो एड्स की जानकारी हुई। पति भी संक्रमित मिला। संक्रमण के डर से संतान करने की मन से निकाल दी। लेकिन, डॉक्टरों के परामर्श से उनके दो बच्चे हैं और स्वस्थ हैं।