भीषण गर्मी में भी आगरा के अंतरराज्यीय बस टर्मिनल (आईएसबीटी) पर पंखे बंद हैं। पूरे परिसर में केवल वेटिंग हॉल में ही पंखे लगे हुए हैं, लेकिन लॉकडाउन के दौरान हजारों की भीड़ होने के बाद भी वेटिंग रूम को प्रवासी श्रमिकों के लिए खोला नहीं गया। ऐसे में श्रमिक भीषण गर्मी में घंटों बसों का इंतजार करने को मजबूर हैं।
परिवहन निगम की बसों को लॉकडाउन में लगातार चलाया जा रहा है, लेकिन यात्री सुविधाएं नहीं हैं। यहां आरओ पानी का स्टॉल बंद है। पीने के पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। यहां आने वाले श्रमिक सार्वजनिक शौचालय के नल से पानी भरने को मजबूर हैं। इसके अलावा पानी का टैंकर नगर निगम से मंगवाया जाता है, जोकि दोपहर तक आता है।
मजदूर सुबह से ही पानी की तलाश करते नजर आते हैं। परिसर में लगे चार छत के पंखे बंद हैं। एक पंखे का हुक खाली है, यहां से पंखा भी उतार लिया गया है। श्रमिक गर्मी में लू के थपेड़े खाकर बसों का इंतजार करते हैं, जबकि बसस्टैंड पर 15 दिन से प्रशासनिक अधिकारियों का भी आनाजाना लगा रहता है।
ऐसी गर्मी में पंखे भी बंद हैं
बस का इंतजार कर रहे बिहार के श्रमिक विनोद कुमार ने बताया कि यहां बहुत गर्मी है, ऐसे में पंखे भी बंद हैं। पीने के पानी के लिए टैंकर तक गया, लेकिन वह पानी भी बहुत गर्म हो गया है। कुछ लोग पानी की बोतल बांटने आए थे, इससे प्यास बुझाई।
लू के थपेड़ों से बीमार होने का डर
श्रमिक रामदीन ने बताया कि बस स्टैंड पर छाया ही मिल सकेगी। यहां पंखे बंद पड़े हैं। पीने का पानी भी गर्म मिल पा रहा है। लू के थपेड़ों से बीमार होने का डर सता रहा है।
तीन श्रमिकों को बुखार देखकर भेजा अस्पताल
बिहार के रहने वाले अयोध्या प्रसाद, हीरालाल और केरल के छोटू की थर्मल स्क्रीनिंग की गई तो उनके शरीर का तापमान 102 से 103 तक आया। इस पर श्रमिकों को एसी गाड़ी में बिठाया गया, क्योंकि बस स्टैंड पर भीषणगर्मी थी, यहां भी उनका तापमान ज्यादा ही आया। इसके बाद उन्हें एंबुलेंस से एसएन मेडिकल कॉलेज भेज दिया गया।
12 बसों से भेजे 750 श्रमिक
आईएसबीटी से बिहार बार्डर, गोरखपुर, झांसी, कौशांबी, कानपुर, कन्नौज, पीलीभीत, बरेली, इटावा, औरैया के लिए 750 से ज्यादा श्रमिकों को भेजा गया। स्टेशन प्रभारी प्रमोद श्रीवास्तव ने बताया कि शाम तक आए सभी श्रमिकों को उनके जिलों के लिए भेजा गया।