शीरोज हैंगआउट कैफे से ही अन्य एसिड अटैक फाइटर्स ने बताया कि तेजाब हमले से सिर्फ उनका चेहरा जला है, हौसले आज भी बुलंद हैं। महिलाओं को किसी भी परिस्थिति में हार नहीं माननी चाहिए। बिजनौर की बाला प्रजापति और उनके दादा पर 2012 में गांव के जमींदार ने तेजाब से हमला किया था, जिसमें वह दोनों झुलस गए।
बाला ने बताया कि जमींदार उनकी मां पर बुरी नीयत रखता था। इसका विरोध करने पर उसने तेजाब फेंक दिया, लेकिन उन्होंने इन परिस्थितियों में हार नहीं मानी और अब सामान्य जीवनयापन कर रही हैं। वहीं, शाहगंज आगरा की नीतू और गीता पर उनके पिता ने 1992 में रात को सोते समय तेजाब फेंक दिया था, इसमें पास में सो रही एक बहन की मृत्यु हो गई।
नीतू बताती हैं कि पिता को बेटे की चाहत थी। इस कारण उन्होंने हमारे ऊपर तेजाब फेंक दिया। पहले तो वह घर से बाहर निकलने में डरती थीं, लेकिन अब उन्होंने आगे आकर सामाजिक बुराइयों से लड़ने की ठानी है।