आगरा आर्थोपेडिक सोसाइटी के सर्वे में 25 से 50 वर्ष की 125 महिलाओं में से 37.6% की हड्डियां कमजोर पाई गईं। डॉक्टरों के अनुसार, मीनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन हार्मोन में कमी और कैल्शियम-विटामिन डी की कमी से मामूली झटके में भी फ्रैक्चर का खतरा बढ़ सकता है।
तेज छींक, अचानक आई खांसी या जरा सी ठोकर... और पसलियों में फ्रैक्चर। अगर आप इसे सामान्य समझ रहे हैं तो सावधान हो जाइए। आगरा आर्थोपेडिक सोसाइटी के हालिया सर्वे में खुलासा हुआ है कि 25 से 50 वर्ष की करीब 38 फीसदी महिलाओं की हड्डियां भीतर से खोखली हो रही हैं। मीनोपॉज के दौर से गुजर रहीं महिलाओं में कैल्शियम और विटामिन-डी की भारी कमी के चलते हड्डियों में अतिसूक्ष्म छिद्र बन रहे हैं, जिससे मामूली झटके में भी मल्टीपल फ्रैक्चर का खतरा तेजी से बढ़ रहा है।
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आगरा आर्थोपेडिक सोसाइटी के सचिव डॉ. संजय चतुर्वेदी ने बताया कि बीते महीने 25 से 50 वर्ष आयु वर्ग की 125 महिलाओं की हड्डियों की जांच की गई थी। इनमें से 37.6 फीसदी महिलाओं की हड्डियां कमजोर पाई गईं। विशेष रूप से 40 से 49 वर्ष की आयु में मीनोपॉज (रजोनिवृत्ति) के दौर से गुजर रहीं महिलाओं के शरीर में कैल्शियम, विटामिन-डी और प्रोटीन की भारी कमी सामने आई। सर्वे में यह चौंकाने वाला तथ्य मिला कि करीब तीन फीसदी महिलाओं को बेहद मामूली झटके या हल्की ठोकर से ही फ्रैक्चर हो रहे थे। यहां तक कि तेज छींक या खांसी आने पर पसलियों में माइनर फ्रैक्चर हो गए।
अतिसूक्ष्म छिद्रों से घट रही हड्डियों की मजबूती
आईएमए के पूर्व अध्यक्ष डॉ. डीवी शर्मा के मुताबिक, मीनोपॉज के दौरान महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर तेजी से गिरता है। इसके चलते हड्डियों में कैल्शियम का अवशोषण कम हो जाता है और उनमें अतिसूक्ष्म छिद्र बनने लगते हैं। इसे चिकित्सकीय भाषा में ऑस्टियोपोरोसिस कहा जाता है। इसके कारण हड्डियां अंदर से स्पंज की तरह खोखली हो जाती हैं और बिना किसी बड़े हादसे के भी पसलियों व कलाई में फ्रैक्चर हो जाता है।
एसएन मेडिकल कॉलेज के हड्डी रोग विभाग के डॉ. रजत कपूर ने बताया कि ओपीडी में रोजाना औसतन 400 मरीज आ रहे हैं। इनमें 40 से 50 वर्ष की महिलाओं में ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या सबसे ज्यादा मिल रही है, जबकि पुरुषों में यह शिकायत 50 वर्ष के बाद अधिक देखने को मिलती है। हड्डियों के कमजोर होने के कारण ऐसे मरीज बार-बार फ्रैक्चर की परेशानी से जूझ रहे हैं।