आकांक्षा परामर्शदात्री समिति पिछले 76 वर्षों से महिला कल्याण में सक्रिय है और 18 वर्षों से महोत्सव में स्टॉल लगा रही है। वहीं शीरोज हैंग आउट कैफे की ओर से पहली बार सर्वाइवर द्वारा तैयार उत्पादों का स्टॉल लगाया गया, जो आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बना।
ताज महोत्सव में महिलाएं अपने संघर्ष, साहस और सफलता की कहानियों के साथ आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। ये महिलाएं अपने आत्मविश्वास और सहनशीलता को अपनी सबसे बड़ी ताकत के रूप में प्रस्तुत कर रही हैं। वह अपने कार्यों से आत्मनिर्भरता का संदेश दे रही हैं।
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आकांक्षा परामर्शदात्री समिति का महोत्सव में अपना स्टॉल है। यह समिति 76 वर्षों से महिला कल्याण के लिए कार्यरत है। समिति पिछले 18 वर्षों से ताज महोत्सव में भाग ले रही है। उनके स्टॉल पर महिलाओं की ओर से तैयार किए गए मसाले बेचे जा रहे हैं। इस बिक्री से होने वाली आमदनी पूरी तरह से महिला कल्याण के कार्यों में लगाई जाती है।
गुजरात से आई पूनम अपने हाथ से बने पर्स के लिए प्रसिद्ध हो रही हैं। उन्होंने बताया कि उनके साथ लगभग 30 से 40 महिलाएं काम करती हैं। पूनम के साथ जुड़ने के बाद महिलाएं आत्मनिर्भर बनी हैं। उनकी आर्थिक स्थिति भी मजबूत हुई है।
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महोत्सव में संगीता देवी अपने परिवार के साथ मधुबनी पेंटिंग की स्टॉल लगाए हैं। यह कार्य उनके पूर्वजों के समय से चला आ रहा है और सरकार उन्हें विशेष रूप से आमंत्रित करती है। मुरादाबाद की तरुश्री आर्या पांच वर्षों से महोत्सव का हिस्सा है और स्वरोजगार कर दूसरों को भी रोजगार देना चाहती हैं। पहली बार शीरोज हैंग आउट कैफे की सर्वाइवर की ओर से भी स्टॉल लगाया गया है, जहां सर्वाइवर की ओर से तैयार वस्तुएं बेची जा रही हैं।