देहव्यापार के दलदल से जिन महिलाओं और युवतियों को मुक्त कराया गया था, एक साल बाद उन्हें ऐसे लोगों के सुपुर्द कर दिया गया, जोकि उनके वास्तविक परिजन थे ही नहीं। ऐसे में यही आशंका है कि महिलाओं और युवतियों को पुन: देह व्यापार में धकेल दिया गया। पुलिस अब तक उन्हें नहीं ढूंढ पाई है।
इलाहाबाद से मुक्त कराकर 67 संवासिनियों को आगरा भेजा गया था। एक साल के लिए उन्हें रखा जाना था। बाद में यह अवधि दो साल और बढ़ा दी गई। मगर, इससे पहले ही 43 संवासिनियों को अवैधानिक तरीके से गीता राकेश ने सुपुर्द कर दिया था। पुलिस की कई टीमों ने संवासिनियों को ढूंढने के प्रयास किए।
संवासिनियों को सुपुर्दगी में लेने के लिए लोगों ने जो पते अंकित कराए थे, उन पतों पर पुलिस टीम भेजी गई। कई के पतों के बारे में पता नहीं चल सका। कई के घरों पर ताले लटके मिले। पुलिस अब तक किसी को ढूंढ नहीं सकी है। हाल ही में कोर्ट के आदेश पर महिलाओं और युवतियों को ढूंढने के लिए पुन: जांच की जा रही है।
पांच संवासिनियां आगरा की
43 में से पांच संवासिनियां आगरा की भी थीं। इनमें से तीन जगनेर क्षेत्र और दो शहर के हरीपर्वत क्षेत्र की थीं। दोबस्ती, पांच धौलपुर (राजस्थान), तीन अलवर, 21 इलाहाबाद, दो पश्चिम बंगाल, एक दिल्ली, एक पुणे (महाराष्ट्र) और तीन छतरपुर की थीं।