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पांच हजार होते तो बच जाती प्रसूता की जान

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ासगंज के ततारपुर में गर्भवती महिला की मौत के बाद उसके घर के बाहर लगी भीड़ - फोटो : KASGANJ
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कासगंज। लॉकडाउन की वजह से लोगों के सामने आर्थिक तंगी है। इससे लोग परेशान है। एक ओर डॉक्टर कोरोना वारियर्स के रूप में काम कर रहे हैं। वहीं एक निजी चिकित्सक ने पांच हजार रुपये नहीं होने पर गर्भवती महिला को रविवार को वापस भेज दिया। बुधवार को इलाज के अभाव में उसकी मौत हो गई।
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रिंकू निवासी ततारपुर कॉलोनी दिहाड़ी मजदूरी करता है। दो साल पहले उसकी शादी जलेसर निवासी रूबी से हुई थी। रूबी नौ माह की गर्भवती थी। रविवार को उसे कुछ दिक्कत होने पर पति उसे जिला चिकित्सालय ले गया। वहां उसे भर्ती नहीं किया गया। कोरोना जांच की बात कह कर वापस भेज दिया गया।
इसके बाद वह एक निजी चिकित्सक के पास ले गए। चिकित्सक ने पांच हजार रुपये की डिमांड की। रिंकूू के पास रुपये की व्यवस्था नहीं तो वह पत्नी को वापस घर ले गया। उसने आसपास के लोगों से भी मदद मांगी, लेकिन कोई भी उसकी मदद के लिए आगे नहीं आया। धन के अभाव में महिला को इलाज नहीं मिल सका। बुधवार की देर रात महिला ने दम तोड़ दिया। महिला की मौत होते ही परिवार में कोहराम मच गया।
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पांच स्थानों पर मिल रही है चिकित्सा सुविधा
कासगंज। जिले में पांच स्थानों पर चिकित्सीय सुविधाएं मिल रही हैं। यह व्यवस्था जिला प्रशासन के द्वारा कायम की गई है। जिले में अन्य चिकित्सकों ने भी इलाज शुरू किया है। इन पांच अस्पतालों में चार नर्सिंग होम हैं। वहीं एक निजी क्लीनिक। सभी नर्सिंग होम में प्रसव की व्यवस्था है।
करवाई जाएगी जांच
उन्हें मामले की जानकारी नहीं है। वे मामले की जांच कराएंगी। जांच में यदि किसी भी कर्मचारी की लापरवाही सामने आई तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। -डॉ. प्रतिमा श्रीवास्तव, सीएमओ
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