आगरा के कमला नगर में गुरुवार को एक घर की रार सड़क पर आ गई। कोर्ट के आदेश पर अपनी सास के घर में शरण लेने गई बहू को उसकी सास ने घर में नहीं घुसने दिया। इतना ही नहीं सास ने पुलिस और वकील में सामने उसे धक्का देकर गिरा दिया। बहू भूखी प्यासी दो दिन से अपनी ससुराल के बाहर अनशन पर है।
पीड़िता मोनिका सचदेवा पत्नी सुमित सचदेवा ने बताया कि उनकी शादी 17 साल पहले कमलानगर के एफ 165 निवासी सुमित सचदेवा के साथ हुई थी। शादी के बाद से ही सास और अन्य ससुरालीजन दहेज को लेकर उसका उत्पीड़न करने लगे। कुछ दिन बाद मोनिका और उनके पति को ससुरालीजनों ने आगरा बल्केश्वर में अलग घर में शिफ्ट दिया।
मोनिका का आरोप है कि कुछ दिन बाद ससुरालीजनों ने धोखे से घर भी बेच और पति को झांसे में लेकर उसके जेवर भी ले लिए। मामले में मोनिका ने आगरा के एसीजेएम कोर्ट में वाद दायर कर ससुरालीजनों के घर में रहने की मांग की।
कोर्ट में नहीं पेश हुए ससुरालीजन
मोनिका की ओर से की गई अपील पर ससुरालीजन कोर्ट में पेश नहीं हुए और नहीं उन्होंने अपने समर्थन में कोई साक्ष्य कोर्ट में दिया। इस आधार पर एसीजेएम कोर्ट ने मोनिका के पक्ष को सत्य मानते हुए उनके हक में फैसला सुना दिया। कोर्ट ने आदेश दिया कि मोनिका के पति अपनी पत्नी और बच्चों को जीवन यापन के लिए भत्ता दें। साथ ही उन्हें साझा घर में रखने को भी कहा।
घर पहुंची तो नहीं घुसने दिया
मामले में बुधवार को जब मोनिका अपनी ससुराल पहुंची तो सास ने उन्हें घर में नहीं घुसने दिया। सूचना पर महिला शांति सेना की अध्यक्ष वत्सला प्रभाकर और कुंदनिका शर्मा भी पहुंच गई। पुलिस भी बुला ली गई। इसके बाद भी सास ने बहू को घर में नहीं घुसने दिया। बहू ने कोशिश की तो धक्का देकर गिरा दिया।
हम पहले ही दे चुके हिस्सा
मामले में मोनिका की सास नीता सचदेवा का कहना है कि उन्होंने पहले ही अपने बेटे और बहू को संपत्ति में हिस्सा दे दिया है। उन्होंने इसे बेच दिया अब इसमें हमारी गलती नहीं है। हम उसे अपने साथ नहीं रखेंगे। मोनिका के एक बेटा और बेटी भी है। सास का कहना है कि हम अपने पोते-पोती के लिए मकान दिलवा देंगे लेकिन घर में नहीं रखेंगे।